श्रमिकों के लिए बड़ी पहल, मालसी में श्रमिक सुविधा केन्द्र का उद्घाटन

देहरादून  ,
उत्तराखंड सरकार ने श्रमिक कल्याण की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए देहरादून के मालसी में उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य संन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अंतर्गत श्रमिक सुविधा केन्द्र का उद्घाटन किया। इस केंद्र का लोकार्पण राज्य के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने किया। इसके साथ ही उन्होंने कई पंजीकृत श्रमिकों को योजनाओं के अंतर्गत सामग्री और उपकरणों का वितरण भी किया।


🛠️ अब इन सुविधाओं का मिलेगा लाभ

श्रमिक सुविधा केंद्र के ज़रिए उत्तराखंड के निर्माण श्रमिकों को अब एक ही स्थान पर कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा:

योजना लाभ
पुत्रियों के विवाह पर सहायता ₹51,000
प्रसूति लाभ ₹6,000
शिक्षा सहायता ₹1,800–₹3,000 प्रति वर्ष
वरिष्ठ पेंशन योजना ₹1,000 (60 वर्ष) / ₹1,500 (65 वर्ष)
कुटुम्ब पेंशन ₹500 प्रतिमाह या पेंशन का 50%
शौचालय निर्माण ₹12,000
टूल किट सहायता ₹10,000 तक
साईकिल, सिलाई मशीन, सौर ऊर्जा उपकरण निःशुल्क
भवन निर्माण या खरीद हेतु सहायता ₹50,000 तक
सामूहिक विवाह योजना (11 जोड़ों पर) ₹61,000 प्रति जोड़ा
मृत्यु सहायता सामान्य मृत्यु पर ₹2 लाख, दुर्घटना में ₹4 लाख

📌 कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने क्या कहा:

“यह केंद्र केवल श्रमिकों के अधिकारों का प्रतीक नहीं, बल्कि उनकी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा का भी गारंटी है। हम चाहते हैं कि हर श्रमिक अपने हक की योजनाओं तक सरलता से पहुंच पाए।”

उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि पुराने लंबित श्रमिक कार्ड जल्द से जल्द बनाए जाएं और नए पंजीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाए।


🖥️ डिजिटल सुविधा और श्रमिक पहचान संख्या

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि भारत सरकार द्वारा श्रमिकों के लिए डिजिटल पोर्टल उपलब्ध कराया गया है, जिसमें पंजीकरण के बाद श्रमिकों को एक विशिष्ट पहचान संख्या (UWIN) दी जाती है। इससे श्रमिक को योजनाओं के लाभ सीधे और पारदर्शी रूप से मिलते हैं।


🏗️ मालसी केंद्र के फायदे:

  • पंजीकरण और पहचान संख्या प्राप्त करना

  • शिकायत निवारण की व्यवस्था

  • योजनाओं की जानकारी और आवेदन

  • तकनीकी और उच्च शिक्षा में सहायता

  • बच्चों के लिए मोबाइल लर्निंग स्कूल, आंगनबाड़ी की सुविधा


✅ समापन में मंत्री का संदेश:

“राज्य सरकार किसान, महिला और श्रमिक वर्ग के साथ खड़ी है। हमारा लक्ष्य है कि हर श्रमिक तक योजना पहुंचे, और उसका जीवन बेहतर बने।”

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