ठगों ने व्हाट्सएप पर बनाया विश्वास, फिर दो किश्तों में मंगवाई मोटी रकम
देहरादून:
उत्तराखंड के एक प्रतिष्ठित होटल के वित्त एवं लेखा विभाग के महाप्रबंधक (GM) तेजपाल रावत से करीब 3.2 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। शातिर ठगों ने खुद को होटल का प्रबंध निदेशक (MD) बताते हुए व्हाट्सएप के जरिए यह जाल बुना।
🔍 ठगी का पूरा घटनाक्रम:
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4 मई को GM को एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप संदेश मिला। डीपी पर एमडी की असली फोटो और कंपनी का लोगो था।
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संदेश में खुद को एमडी बताकर नया नंबर बताया गया और विश्वास दिलाया गया कि यह व्यक्तिगत संपर्क के लिए है।
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5 मई को उसी नंबर से होटल के बैंक खाते की जानकारी मांगी गई और फिर एक स्थानीय प्रोजेक्ट के लिए 1.95 करोड़ रुपये की तत्काल ट्रांसफर का निर्देश दिया गया।
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GM ने इंडसइंड बैंक, कोलकाता स्थित श्याम ट्रेडिंग कंपनी के खाते में यह राशि भेज दी।
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इसके बाद 2 करोड़ रुपये की अनुबंध सिक्योरिटी जमा करने को कहा गया। GM ने होटल के खाते में सीमित राशि होने की बात कही और 1.25 करोड़ रुपये और ट्रांसफर कर दिए।
🚨 सच सामने आया ऐसे:
GM ने जब असली एमडी के पुराने नंबर पर कॉल किया तो पता चला कि ऐसा कोई निर्देश कभी नहीं दिया गया था। यहीं से ठगी का एहसास हुआ।
👮♂️ पुलिस कार्रवाई:
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शिकायत मिलते ही साइबर क्राइम थाना, देहरादून में मामला दर्ज किया गया।
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सीओ अंकुश मिश्रा ने बताया कि ट्रांसफर किए गए बैंक खातों की जांच की जा रही है।
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पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ आईटी एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
⚠️ साइबर सुरक्षा के लिए यह सबक:
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व्हाट्सएप डीपी या नाम देखकर कभी कोई वित्तीय फैसला न लें।
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उच्चाधिकारियों से नए नंबर पर निर्देश मिले तो पुराने नंबर या ऑफिस माध्यम से पुष्टि अवश्य करें।
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बड़ी रकम के लेन-देन से पहले टेलीफोनिक या मेल द्वारा पुष्टि करें।
यह घटना न केवल साइबर जागरूकता की कमी को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि ठग अब कितनी तकनीकी चालाकी से विश्वास का जाल बुनते हैं।
