सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने में मिलेगी मदद, 440 संकेतकों के आधार पर तय होंगे विकास के लक्ष्य
देहरादून ,
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में ‘देवभूमि परिवार पोर्टल’ का शुभारंभ किया और ‘विकसित उत्तराखंड विजन-2047’ का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों पहलें प्रदेश में सुशासन को मजबूत करने, सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने और उत्तराखंड के दीर्घकालिक विकास को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी सरकार की सफलता का वास्तविक पैमाना केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। कई बार जानकारी के अभाव में पात्र लोग सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते। वहीं, एक ही जानकारी के लिए बार-बार दस्तावेज जमा करने और विभिन्न विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। देवभूमि परिवार पोर्टल इन समस्याओं को कम करने के साथ सरकारी सेवाओं को सरल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने में मदद करेगा।
हर परिवार को मिलेगी विशिष्ट डिजिटल आईडी
प्रमुख सचिव नियोजन डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि देवभूमि परिवार पोर्टल का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के परिवारों का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है। इसके माध्यम से परिवारों और उनके सदस्यों की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी। पंजीकरण के बाद प्रत्येक परिवार को एक विशिष्ट ‘देवभूमि परिवार आईडी’ प्रदान की जाएगी।
पोर्टल से सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की पहचान, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। इसके साथ ही योजनाओं की निगरानी, लाभार्थियों की आवश्यकताओं का आकलन तथा बजट और सरकारी संसाधनों का बेहतर नियोजन भी किया जा सकेगा। पोर्टल के प्रभावी संचालन के लिए राज्य स्तर पर देवभूमि परिवार प्राधिकरण और जिला स्तर पर जिला देवभूमि परिवार अधिकारी की व्यवस्था प्रस्तावित है।
2047 तक 28 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री के ‘21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा’ संकल्प से प्रेरणा लेते हुए राज्य सरकार प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए काम कर रही है।
‘विकसित उत्तराखंड विजन-2047’ को प्रदेश के समग्र विकास की दिशा तय करने वाली कार्ययोजना बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सभी विभागों और जनपदों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं बनाकर समयबद्ध तरीके से काम करना होगा।
प्रमुख सचिव नियोजन ने बताया कि विजन-2047 में लगभग 440 संकेतकों के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक विकास लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। वर्ष 2047 तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लगभग 28 लाख करोड़ रुपये और प्रतिव्यक्ति आय को लगभग 20 लाख रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा बेरोजगारी दर को 3.5 प्रतिशत और बहुआयामी गरीबी को 0.61 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।
कनेक्टिविटी और पर्यटन को मिल रही मजबूती
मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार के प्रयासों से प्रदेश में सड़क, रेल, हवाई संपर्क और आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और चारधाम सड़क परियोजना से राज्य की कनेक्टिविटी मजबूत हो रही है।
उन्होंने कहा कि केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्यों के साथ मानसखंड मंदिर माला मिशन तथा अन्य धार्मिक पर्यटन परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। शीतकालीन यात्रा के माध्यम से प्रदेश में वर्षभर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
महिलाओं के सशक्तीकरण और रोजगार पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में औद्योगिक निवेश, स्वरोजगार और स्टार्टअप को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने के साथ स्वयं सहायता समूहों और लखपति दीदी योजना के जरिए आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की तीन लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य की अर्थव्यवस्था डेढ़ गुना से अधिक बढ़ चुकी है। पिछले एक वर्ष में प्रदेश की जीएसडीपी में 7.23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रतिव्यक्ति आय में 41 प्रतिशत की वृद्धि और रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी को उन्होंने राज्य में हो रहे सकारात्मक बदलावों का संकेत बताया। सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं, स्थानीय रोजगार और आजीविका के अवसरों के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
‘प्रकृति के साथ प्रगति’ होगा विकास का आधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का विकास मॉडल ‘प्रकृति के साथ प्रगति’ पर आधारित होना चाहिए। हिमालय, नदियां, वन संपदा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत प्रदेश की पहचान हैं। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य होने के कारण प्रत्येक विकास योजना में पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन और सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों की नियमित समीक्षा करने और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में उत्तराखंड महत्वपूर्ण योगदान देगा और राज्य सरकार प्रदेश के समग्र एवं संतुलित विकास के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।
