एम्स ऋषिकेश के विशेषज्ञों ने भावनात्मक संतुलन, गुस्से पर नियंत्रण और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर दी जानकारी
देहरादून,
पुलिसकर्मियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने और तनाव प्रबंधन के व्यावहारिक तरीके सिखाने के उद्देश्य से गुरुवार को पुलिस लाइन देहरादून में विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण समिति, देहरादून की ओर से आयोजित इस कार्यशाला का विषय ‘सुसाइड प्रिवेंशन थ्रू युवा जोश (YUWA JOSH)’ रहा। कार्यक्रम में एम्स ऋषिकेश के सोशल आउटरीच सेल ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने पुलिसकर्मियों की व्यस्त और चुनौतीपूर्ण कार्यशैली के बीच मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने, तनाव एवं अवसाद से निपटने, भावनाओं को समझने और समय पर परामर्श लेने के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।
परिवार और मित्रों का सहयोग तनाव से उबरने में अहम
देहरादून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने कहा कि तनाव और अवसाद से निपटने में परिवार एवं मित्रों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। पुलिसकर्मियों पर काम का दबाव और जिम्मेदारियां अधिक रहती हैं, ऐसे में अपनों के साथ संवाद और भावनात्मक सहयोग उन्हें कठिन परिस्थितियों से उबरने में मदद कर सकता है।
उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को गंभीरता से लेने और जरूरत पड़ने पर सहयोग प्राप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
गुस्से और भावनाओं को नियंत्रित करने के बताए तरीके
एम्स ऋषिकेश के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर एवं युवा स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि लगातार कार्य का दबाव झेलने वाले पुलिसकर्मियों के लिए अपनी भावनाओं को व्यक्त करना और मानसिक लचीलापन विकसित करना जरूरी है।
उन्होंने पुलिस जवानों को गुस्से और भावनात्मक प्रबंधन के विभिन्न तरीके समझाए। साथ ही ‘बैलून थेरेपी’ जैसी सरल तकनीकों के माध्यम से भावनाओं को संतुलित करने के व्यावहारिक उपाय भी बताए।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए समय पर संवाद और परामर्श जरूरी
एम्स ऋषिकेश की मनोवैज्ञानिक डॉ. ब्रूज़िली अब्राहम ने मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन की बढ़ती अपेक्षाएं युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों में समय पर संवाद, भावनात्मक सहयोग और विशेषज्ञों से परामर्श लेना महत्वपूर्ण है।
कार्यशाला के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें पहचानना, परिवार एवं मित्रों से खुलकर बात करना और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना आत्महत्या की रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
पुलिस जवानों ने साझा किए अनुभव
पुलिस लाइन के सम्मेलन कक्ष में आयोजित इस सत्र में पुलिस जवानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबंधन से जुड़े सवाल पूछे। विशेषज्ञों ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में सीओ श्री अंकित कंडारी, नारकोटिक्स इंस्पेक्टर श्री मुकेश त्यागी, एमएंडईओ श्री शुभांश भट्ट, आईईसी समन्वयक पूजन नेगी तथा एनसीडी अनुभाग से श्री प्रवीण खत्री सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यशाला का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को मानसिक रूप से सशक्त बनाना और तनावपूर्ण परिस्थितियों में स्वयं के मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ अपने सहकर्मियों की भावनात्मक जरूरतों के प्रति भी संवेदनशील बनाना रहा।
