इम्पल्स ऑसिलोमेट्री और बॉडी बॉक्स मशीन से जटिल श्वास रोगों का होगा बेहतर निदान
देहरादून ,
श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल ने फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों की अत्याधुनिक जांच के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुविधा शुरू की है। अस्पताल के छाती एवं श्वास रोग विभाग में इटली की अत्याधुनिक इम्पल्स ऑसिलोमेट्री और बॉडी बॉक्स मशीनों की स्थापना की गई है। इन मशीनों के माध्यम से फेफड़ों की कार्यक्षमता का सूक्ष्म और वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सकेगा।
खास बात यह है कि इम्पल्स ऑसिलोमेट्री के जरिए छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों, बुजुर्गों और उन मरीजों की भी फेफड़ों की जांच की जा सकेगी, जो सामान्य स्पाइरोमेट्री टेस्ट कराने में असमर्थ होते हैं। इससे अस्थमा, सीओपीडी, एलर्जी, स्मॉल एयरवे डिजीज समेत अन्य जटिल श्वास संबंधी रोगों की शुरुआती स्तर पर पहचान में मदद मिलेगी।
गुरुवार को छाती एवं श्वास रोग विभाग में आयोजित कार्यक्रम में श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज के प्राचार्य डॉ. उत्कर्ष शर्मा, श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल मलिक, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीरेन्द्र वर्मा तथा विभागाध्यक्ष डॉ. जगदीश रावत ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर आधुनिक जांच सुविधाओं का शुभारंभ किया।
सामान्य सांस लेने से हो सकेगी जांच
विभागाध्यक्ष डॉ. जगदीश रावत ने बताया कि इम्पल्स ऑसिलोमेट्री फेफड़ों की जांच की अत्याधुनिक तकनीक है। इसमें मरीज को सामान्य रूप से सांस लेनी होती है और मशीन वायु नलिकाओं में होने वाले बेहद सूक्ष्म बदलावों का पता लगाती है। उन्होंने बताया कि कई बार ऐसे बदलाव सामान्य स्पाइरोमेट्री जांच में स्पष्ट नहीं हो पाते।
बॉडी बॉक्स से फेफड़ों की क्षमता का विस्तृत आकलन
उन्होंने बताया कि बॉडी बॉक्स मशीन फेफड़ों की संपूर्ण क्षमता, अवशिष्ट वायु और फेफड़ों में हवा के प्रवाह का विस्तृत विश्लेषण करती है। इससे उन फेफड़ों की बीमारियों की पहचान में भी मदद मिलती है, जो सामान्य स्पाइरोमेट्री में स्पष्ट नहीं हो पातीं।
डॉ. रावत ने कहा कि दोनों अत्याधुनिक मशीनों के शुरू होने से उत्तराखंड के मरीजों को उच्चस्तरीय फेफड़ा जांच की सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगी। इससे जटिल श्वास रोगों के अधिक सटीक और समयबद्ध निदान एवं उपचार में चिकित्सकों को सहायता मिलेगी।
कार्यक्रम में अस्पताल के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, चिकित्सक, अस्पताल स्टाफ तथा छाती एवं श्वास रोग विभाग के चिकित्सक एवं कर्मचारी मौजूद रहे।