टेंडर पूलिंग के आरोपों पर कोर्ट ने जताई प्रथमदृष्टया गंभीरता, बैंक लेनदेन, IP एड्रेस और समझौते को माना महत्वपूर्ण
देहरादून ,
पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) की वर्ष 2016 की एक निविदा में कथित टेंडर पूलिंग और आपराधिक साजिश से जुड़े मामले में न्यायालय ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट (एफआर) को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट/द्वितीय अपर सिविल जज (जूडि.) दीपक राजपूत की अदालत ने 22 सितंबर 2026 को विवेचक दीपक रावत की ओर से दाखिल अंतिम रिपोर्ट को संदिग्ध और अस्पष्ट मानते हुए खारिज कर दिया।
अदालत ने सूर्य प्रकाश आर्य की ओर से दाखिल प्रोटेस्ट याचिका को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के तहत परिवाद के रूप में संज्ञान लेने का पर्याप्त आधार माना है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, अदालत ने बैंक लेनदेन, निविदा प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज, ऑनलाइन गतिविधियों में समान Remote IP Address और कंपनियों के बीच हुए समझौते सहित कई परिस्थितियों को प्रथमदृष्टया महत्वपूर्ण माना।
2016 की निविदा में तीन कंपनियों की भूमिका पर सवाल
मामला थाना पटेलनगर में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 29/2023 से संबंधित है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120-बी के तहत कार्रवाई की गई थी। शिकायत पिटकुल की उस निविदा से जुड़ी है, जिसमें “Upgradation of Control & Protection System and Replacement of Different Substation Equipments (Phase-I), Package-A” के तहत कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र के विभिन्न सबस्टेशनों में कंट्रोल एवं रिले पैनल, NIFPS, GPS क्लॉक सहित अन्य उपकरणों की आपूर्ति, स्थापना और कमीशनिंग प्रस्तावित थी।
पिटकुल ने 18 मई 2016 को टेंडर आमंत्रित किया था। रिकॉर्ड में ईशान इंटरप्राइजेज, कोलकाता, एचईसी इन्फ्रा प्रोजेक्ट, अहमदाबाद और सिगनेट प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड, पुणे सहित छह कंपनियों के भाग लेने का उल्लेख है। आरोप इन तीन कंपनियों के बीच कथित आपसी सांठगांठ और टेंडर पूलिंग से संबंधित हैं।
अलग-अलग कंपनियां, लेकिन टेंडर दस्तावेज का भुगतान एक खाते से
अदालत के समक्ष रखे दस्तावेजों के अनुसार, तीनों कंपनियां अलग-अलग शहरों में स्थित थीं और अलग-अलग निविदाकार के रूप में शामिल हुईं। इसके बावजूद टेंडर दस्तावेज खरीदने के लिए किए गए भुगतान ईशान इंटरप्राइजेज के बैंक खाते से किए गए।
रिकॉर्ड में ईशान इंटरप्राइजेज, सिगनेट प्रोडक्ट और एचईसी इन्फ्रा प्रोजेक्ट के लिए 28,375 रुपये के तीन भुगतान का उल्लेख है। पुलिस विवेचना के दौरान पंजाब नेशनल बैंक, इंदिरा नगर से इन लेनदेन से संबंधित दस्तावेज भी प्राप्त किए गए थे। अदालत ने इन दस्तावेजों को कंपनियों के बीच प्रथमदृष्टया संबंध का संकेत माना।
53.62 लाख रुपये की EMD भी जांच के दायरे में
मामले में 53.62 लाख रुपये की अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (EMD) भी महत्वपूर्ण है। रिकॉर्ड के अनुसार सिगनेट प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से जमा की गई यह राशि ईशान इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर राजेंद्र मिमानी के पुत्र आशीष मिमानी के बैंक खाते से जारी डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से जमा हुई।
ICICI बैंक की प्रीत एन्क्लेव, सहारनपुर रोड शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार 17 जून 2016 को 53,62,000 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट आशीष मिमानी के खाते से जारी किया गया था। अदालत ने बैंक रिकॉर्ड और विवेचना में दर्ज इस तथ्य को भी महत्वपूर्ण माना।
टेंडर खुलने से एक दिन पहले हुआ समझौता
विवेचना में ईशान इंटरप्राइजेज और सिगनेट प्रोडक्ट के बीच 17 जून 2016 को हुए एक समझौते का भी उल्लेख है। इसके तहत सिगनेट को परियोजना से जुड़े तकनीकी और इंजीनियरिंग कार्यों में सलाहकार/सेवा प्रदाता के रूप में जोड़े जाने की बात सामने आई।
रिकॉर्ड के मुताबिक पिटकुल का टेंडर 18 जून 2016 को खुलना था। अदालत ने इस परिस्थिति पर गौर किया कि दोनों कंपनियों के बीच टेंडर खुलने से एक दिन पहले ही समझौता हुआ और दोनों ने उसी दिन अपनी-अपनी बोलियां भी जमा की थीं। अदालत ने इसे प्रथमदृष्टया महत्वपूर्ण परिस्थिति माना।
एक ही Remote IP Address से ऑनलाइन गतिविधि
मामले में डिजिटल साक्ष्य भी सामने आया। जांच रिकॉर्ड के अनुसार ईशान इंटरप्राइजेज और सिगनेट प्रोडक्ट की ऑनलाइन टेंडर गतिविधियों में एक ही Remote IP Address 59:89:20:36 दर्ज हुआ।
अदालत ने विवेचना की सीडी का अवलोकन करने के बाद इस तथ्य को भी दोनों कंपनियों के बीच टेंडर प्रक्रिया के दौरान प्रथमदृष्टया संबंध का संकेत माना।
Joint Venture को लेकर पुलिस की दलील पर भी सवाल
पुलिस की अंतिम रिपोर्ट में यह तर्क दिया गया था कि ईशान इंटरप्राइजेज ने अन्य कंपनियों के साथ Joint Venture किया था, इसलिए इसे टेंडर पूलिंग नहीं माना जा सकता। हालांकि अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार ईशान इंटरप्राइजेज का Joint Venture सीटीआर मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रीज और वेंसन इलेक्ट्रिक के साथ था।
वहीं, एचईसी इन्फ्रा और सिगनेट अलग-अलग निविदाकार के तौर पर प्रक्रिया में शामिल थे। इसी आधार पर अदालत ने ईशान और सिगनेट के बीच हुए अलग समझौते को मामले के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना।
टेंडर शर्तों में कारोबारी संबंधों के खुलासे का मुद्दा
रिकॉर्ड में निविदा की Instruction to Bidders (ITB), Part-I, Clause 22.5 का भी उल्लेख है। इसके तहत वित्तीय अथवा गैर-वित्तीय संबंध रखने वाले प्रतिभागियों को ऐसे संबंधों का खुलासा करना आवश्यक था।
प्रोटेस्ट याचिका में आरोप लगाया गया कि ईशान, सिगनेट और एचईसी के बीच मौजूद कथित संबंधों का निविदा प्रक्रिया में खुलासा नहीं किया गया। इन आरोपों में कथित गलत या कूट-रचित घोषणापत्रों के इस्तेमाल की बात भी कही गई है। हालांकि इन आरोपों का अंतिम न्यायिक निर्धारण अभी होना बाकी है।
पुलिस की केस डायरी में मौजूद तथ्यों पर कोर्ट ने जताई आपत्ति
अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि जिन दस्तावेजों और तथ्यों को पुलिस ने अपनी विवेचना में एकत्र किया, उन्हीं के बावजूद विवेचक ने अंतिम रिपोर्ट में धोखाधड़ी के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही।
बैंक लेनदेन, Remote IP Address, सिगनेट की EMD और ईशान-सिगनेट समझौते से संबंधित दस्तावेज केस रिकॉर्ड का हिस्सा थे। अदालत ने विवेचना में सामने आए इन तथ्यों और अंतिम रिपोर्ट के निष्कर्षों के बीच विरोधाभास को गंभीरता से लिया।
कोर्ट ने एफआर स्वीकार करने से किया इनकार
सभी उपलब्ध दस्तावेजों और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद अदालत ने विवेचक दीपक रावत की अंतिम रिपोर्ट को संदिग्ध और अस्पष्ट माना और उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
न्यायालय ने मुकदमा अपराध संख्या 29/2023 में दाखिल अंतिम रिपोर्ट खारिज करते हुए सूर्य प्रकाश आर्य की प्रोटेस्ट याचिका को परिवाद के रूप में आगे बढ़ाने का आदेश दिया। कार्यालय को इसे फौजदारी वाद के रूप में दर्ज करने तथा संबंधित दस्तावेज और आदेश की प्रमाणित प्रति नई पत्रावली में संलग्न करने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले की प्रमुख टाइमलाइन
- 18 मई 2016: पिटकुल ने निविदा आमंत्रित की।
- 13 जून 2016: ईशान इंटरप्राइजेज का सीटीआर मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रीज और वेंसन इलेक्ट्रिक के साथ Joint Venture दस्तावेज।
- 17 जून 2016: ईशान और सिगनेट के बीच समझौता; इसी दिन 53.62 लाख रुपये की EMD से संबंधित डिमांड ड्राफ्ट जारी हुआ।
- 17 जून 2016: ईशान और सिगनेट की ऑनलाइन टेंडर गतिविधियों में समान Remote IP Address दर्ज होने की बात विवेचना में सामने आई।
- 18 जून 2016: टेंडर खुलने की तारीख।
- 28 दिसंबर 2023: विवेचक दीपक रावत की ओर से अंतिम रिपोर्ट दाखिल।
- 27 मई 2024: सूर्य प्रकाश आर्य की ओर से अंतिम रिपोर्ट के खिलाफ प्रोटेस्ट याचिका।
- 22 सितंबर 2026: अदालत ने अंतिम रिपोर्ट खारिज कर प्रोटेस्ट याचिका को परिवाद के रूप में आगे बढ़ाने का आदेश दिया।
नोट: उपलब्ध सार्वजनिक वेब खोज में इस विशिष्ट 22 सितंबर 2026 के न्यायालय आदेश की मूल प्रति मुझे स्वतंत्र रूप से नहीं मिली; इसलिए ऊपर की खबर आपके दिए गए न्यायालय-रिकॉर्ड विवरण के आधार पर संपादित की गई है।
