1 जनवरी से 18 सितंबर तक त्वरित कार्रवाई; पिछले 15 दिनों में 11 मामलों में पीड़ितों की रकम कराई गई होल्ड
देहरादून ,
उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए राष्ट्रीय वित्तीय साइबर हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से इस वर्ष 1 जनवरी से 18 सितंबर तक 25.42 करोड़ रुपये की धनराशि बचाने में सफलता हासिल की है। शिकायत मिलते ही हेल्पलाइन के माध्यम से संबंधित बैंक और नोडल अधिकारियों से समन्वय कर ठगी की रकम को तत्काल होल्ड कराने की कार्रवाई की जाती है।
पिछले 15 दिनों में ही 1930 कंट्रोल रूम ने 11 बड़े साइबर फ्रॉड मामलों में त्वरित कार्रवाई की। इनमें ऑनलाइन फ्रॉड, APK फाइल के जरिए धोखाधड़ी और निवेश संबंधी साइबर ठगी के मामले शामिल रहे।
देहरादून निवासी सुरेन्द्र कौर ने 2 सितंबर को 1,95,982 रुपये की साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद कार्रवाई करते हुए 1,27,742 रुपये बचाए गए। डोईवाला की अलका नौटियाल की 50 हजार रुपये की ठगी में से 49,627 रुपये, बागेश्वर के ललित जोशी की शिकायत में 66,283 रुपये और नैनीताल के रघुवीर सिंह मटियाल की ठगी में 75,030 रुपये बचाए गए।
वहीं, देहरादून की आरती वर्मा के मामले में निवेश फ्रॉड के जरिए 7.70 लाख रुपये की ठगी की शिकायत मिली थी। त्वरित कार्रवाई के बाद इसमें से 6,94,484 रुपये होल्ड कराए गए।
शिकायत मिलते ही बैंक अधिकारियों से किया जाता है समन्वय
STF के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर 1930 हेल्पलाइन में शिकायत प्राप्त होते ही संबंधित बैंकों एवं नोडल अधिकारियों से संपर्क किया जाता है। इसके बाद ठगी की धनराशि को तत्काल होल्ड कराने का प्रयास किया जाता है। समय पर शिकायत मिलने से पीड़ित की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने की संभावना बढ़ जाती है।
STF ने लोगों को साइबर ठगी से बचने के दिए सुझाव
STF ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने के लिए न दें। कमीशन के लालच में बैंक खाता किराए पर देना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है। इसके अलावा ATM कार्ड, OTP, PIN और UPI PIN किसी के साथ साझा न करने की सलाह दी गई है।
अज्ञात स्रोत से खाते में धनराशि आने पर तत्काल बैंक और पुलिस को सूचना देने, अनजान नंबरों से आने वाली वीडियो कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने तथा फर्जी निवेश योजनाओं से सावधान रहने को कहा गया है।
STF ने यह भी स्पष्ट किया है कि पुलिस, CBI या ED के नाम पर होने वाले ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम से डरने की आवश्यकता नहीं है। साथ ही, गूगल पर मिले अनधिकृत कस्टमर केयर नंबरों के बजाय संबंधित कंपनी के आधिकारिक माध्यमों से ही संपर्क करने की सलाह दी गई है।
साइबर ठगी होते ही 1930 पर करें शिकायत
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि साइबर ठगी की घटना होने पर बिना देरी किए 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। त्वरित शिकायत से ठगी गई रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने की कार्रवाई की जा सकती है।
