देहरादून ,
भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित पासिंग आउट परेड (पीओपी) की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। इस वर्ष होने वाली 158वें रेगुलर कोर्स और 141वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स की पासिंग आउट परेड कई मायनों में ऐतिहासिक और विशेष रहने वाली है। देश की राष्ट्रपति एवं सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर Droupadi Murmu इस भव्य समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर नवप्रशिक्षित कैडेट्स की सलामी लेंगी।
राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे को देखते हुए अकादमी परिसर में सुरक्षा व्यवस्था से लेकर परेड की तैयारियों तक विशेष सतर्कता बरती जा रही है। राष्ट्रपति की मौजूदगी ने समारोह की गरिमा को और बढ़ा दिया है, वहीं कैडेट्स और सैन्य अधिकारियों में भी उत्साह का माहौल है।
इस बार की पासिंग आउट परेड एक ऐतिहासिक उपलब्धि की भी साक्षी बनेगी। पहली बार महिला कैडेट्स इस गौरवशाली समारोह का हिस्सा बनेंगी। इसे भारतीय सेना में महिला सशक्तिकरण और बढ़ती भागीदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आईएमए प्रशासन इसे संस्थान के इतिहास का एक यादगार और गौरवपूर्ण अध्याय मान रहा है।
परेड के सफल आयोजन के लिए कैडेट्स लगातार कठिन अभ्यास और विशेष प्रशिक्षण से गुजर रहे हैं। ड्रिल, मार्चिंग और सैन्य अनुशासन के विभिन्न पहलुओं पर गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि समारोह पूरी भव्यता और उत्कृष्टता के साथ संपन्न हो सके। वरिष्ठ सैन्य अधिकारी नियमित रूप से प्रशिक्षण की समीक्षा कर कैडेट्स का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
पासिंग आउट परेड भारतीय सैन्य अकादमी के प्रशिक्षण सत्र के समापन का प्रतीक होती है। परेड के बाद कैडेट्स भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त कर देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी सेवाएं देंगे और राष्ट्र रक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालेंगे।
गौरतलब है कि Indian Military Academy की स्थापना 1 अक्टूबर 1932 को हुई थी। इसका उद्घाटन तत्कालीन कमांडर-इन-चीफ Field Marshal Sir Philip Chetwode ने किया था। उस समय अकादमी की प्रशिक्षण क्षमता मात्र 40 जेंटलमैन कैडेट्स की थी, जो आज बढ़कर लगभग 1650 कैडेट्स तक पहुंच चुकी है। स्थापना से अब तक 64 हजार से अधिक कैडेट्स यहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर भारतीय सेना में अधिकारी बन चुके हैं और देश सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
राष्ट्रपति की मौजूदगी में आयोजित होने वाली यह पासिंग आउट परेड न केवल नवप्रशिक्षित अधिकारियों के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण क्षण होगी, बल्कि भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं, अनुशासन और समर्पण की भी भव्य झलक प्रस्तुत करेगी।