उत्तराखंड ने खोया अपना कर्मयोगी नेता, मेजर जनरल बीसी खंडूरी का निधन

देहरादून,

उत्तराखंड की राजनीति और देश के सैन्य इतिहास के एक बड़े स्तंभ, पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता Bhuvan Chandra Khanduri मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी का मंगलवार को देहरादून के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 91 वर्ष के थे और लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से पूरे देश, विशेषकर उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई।

प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे देश और उत्तराखंड के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

सेना से राजनीति तक सेवा का अनुकरणीय सफर

1 अक्टूबर 1934 को जन्मे मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी ने अपना जीवन राष्ट्रसेवा को समर्पित किया। राजनीति में आने से पहले उन्होंने भारतीय सेना में लंबी और गौरवशाली सेवा दी। वे सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स में मेजर जनरल के पद तक पहुंचे। वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान उन्होंने अग्रिम मोर्चे पर अहम भूमिका निभाई। सेना में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें ‘अति विशिष्ट सेवा पदक’ (AVSM) से सम्मानित किया गया था।

सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और अपनी ईमानदारी, सादगी और अनुशासन के लिए अलग पहचान बनाई। पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee के करीबी माने जाने वाले खंडूरी को केंद्र सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

देश की महत्वाकांक्षी ‘स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना’ को जमीन पर उतारने और राष्ट्रीय राजमार्गों के आधुनिकीकरण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी कार्यशैली और प्रशासनिक क्षमता के कारण उन्हें बाद में कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया गया।

उत्तराखंड में सुशासन और पारदर्शिता की पहचान

भुवन चंद्र खंडूरी पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट से चार बार सांसद चुने गए। वर्ष 2007 में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनाया गया। वे दो बार मुख्यमंत्री रहे — पहली बार 2007 से 2009 तक और दूसरी बार 2011 से 2012 तक।

मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल ईमानदार और अनुशासित प्रशासन के लिए जाना गया। उनके द्वारा लाया गया सख्त लोकायुक्त बिल आज भी भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों के क्षेत्र में एक मिसाल माना जाता है। “खंडूरी हैं जरूरी” का नारा उनकी लोकप्रियता और साफ-सुथरी छवि का प्रतीक बन गया था।

पूरे राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

राजनीतिक विश्लेषकों और सामाजिक संगठनों ने उनके निधन को देश के लिए बड़ी क्षति बताया है। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ किया जाएगा। मेजर जनरल खंडूरी का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति, ईमानदारी और जनसेवा की प्रेरणा बना रहेगा।

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