जांच रिपोर्ट केंद्रीय अध्यक्ष पूरण सिंह कठैत को सौंपी
देहरादून ,
मसूरी के जाॅर्ज एवरेस्ट में चल रहे गतिरोध की सत्यता जानने के लिए उत्तराखंड क्रांति दल की तथ्यान्वेषी टीम मौके पर गई और वहां जांच के बाद रिपोर्ट केंद्रीय अध्यक्ष पूरण सिंह कठैत को सौंप दी है। आज दल के कचहरी रोड स्थित केन्द्रीय कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए तथ्यान्वेषी टीम के सदस्य समीर मुंडेपी, मोहित डिमरी एवं लुशुन टोडरिया ने संयुक्त रूप से कहा कि तथ्यान्वेषी समिति के सदस्य बीती 11 अक्टूबर को जॉर्ज एवरेस्ट मसूरी में जांच के लिए पहुँचे थे। उन्होंने कहा कि जॉर्ज एवरेस्ट पार्क एस्टेट का हिस्सा है, वहां राजस ऐरोस्पोर्ट्स एंड एडवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के महाप्रबंधक केशव और अन्य कर्मचारियों से टीम ने मुलाकात की और पर्यटन विभाग के साथ हुए अनुबंध की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि इस दौरान इसके साथ ही स्थानीय निवासियों की उपस्थिति में एस्टेट में रह रहे निवासियों और मूल निवासियों से अवैध वसूली और रास्ता रोकने की शिकायत को जाना। इस दौरान उक्रांद के वरिष्ठ नेताओ ने बैरियर और अवैध वसूली का विरोध किया और कंपनी के अधिकारियों को चेताया कि किसी भी सूरत में स्थानीय निवासियों का रास्ता न रोका जाए। उन्होंने कहा कि समिति के सदस्य मसूरी में स्थानीय मूल निवासियो के साथ उप जिलाधिकारी से भी मिले, जिस मीटिंग में नंदन कुमार उप जिलाधिकारी, सुशील नौटियाल पर्यटन विभाग, शिव चरण प्रोजेक्ट हेड राजस ऐरोस्पोर्ट्स एंड एडवेंचर्स उपस्थित थे। मीटिंग में उप जिलाधिकारी द्वारा निर्णय लिया गया कि पार्क एस्टेट में रहने वाले निवासियों और दुकानदारों से एंट्री फीस नहीं ली जाएगी और जिन्हें पर्यटन विभाग पास आवंटित करेगा। उन्होंने बताया कि स्थानीय निवासियों के फ्री एंट्री को विचाराधीन रखा गया। उन्होंने कहा कि जाँच के दौरान टीम ने तथ्य जुटाए और पाया कि पार्क एस्टेट भूमि सर जॉर्ज एवरेस्ट द्वारा स्वर्गीय गोपाल शाह को दी गई। उन्होंने कहा कि जो 945 एकड़ के करीब है। उन्होंने कहा कि जो वर्तमान में मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के अंतर्गत आता है और नॉन लैंड है। उन्होंने कहा कि सर जॉर्ज एवरेस्ट के समय से हाथीपांव से जॉर्ज एवरेस्ट तक का रास्ता बिना पाबन्दी का था। पार्क एस्टेट निवासियों की सेल डीड में भी स्पष्ट किया गया की रास्ते खुले रखे जाएंगे और इससे किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं होगी। उन्होंने कहा कि पार्क हाउस रोड अनरिस्ट्रिक्टेड रहेगी और किसी भी अन्य प्रयोग में नहीं लाई जा सकती। उन्होंने बताया कि जांच में यह भी सामने आया कि स्वर्गीय गोपाल शाह से 1967 में चंद्र प्रकाश शर्मा नौटियाल ने 40 एकड़ भूमि क्रय की और जिसमें से 25 एकड़ भूमि 1992 में उत्तर प्रदेश टूरिज्म विभाग द्वारा ऑर्चिड हेतु अधिग्रहीत किया गई। उन्होंने कहा कि 12 सितम्बर 1979 ठेचकु मल्ल ने पांच एकड़ भूमि पार्क एस्टेट में महेश चंद्र शाह से क्रय की। उन्होंने कहा कि महेश शाह ने 1963 में स्वर्गीय गोपाल शाह से पार्क एस्टेट में जमीन खरीदी थी। उन्होंने कहा कि जिसमें राइट ऑफ वेज रास्तों का जिक्र है। उन्होंने कहा कि इसी तरह शाह परिवार से ही कमलेश कोहली द्वारा 1988 में पार्क एस्टेट में 3.5 एकड़ जमीन खरीदी। उन्होंने कहा कि पार्क एस्टेट में ऐसे ही कई अन्य लोगो ने शाह परिवार से जमीने खरीदी। उन्होंने कहा कि 1992 से उत्तर प्रदेश टूरिज्म विभाग ने पार्क एस्टेट में शाह परिवार व अन्यों से भूमि अधिग्रहीत करनी शरू की। उन्होंने कहा कि स्थानीय निवासियों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई। उन्होंने कहा कि उपजिलाधिकारी एवं पर्यटन विभाग द्वारा पार्क एस्टेट निवासियों को फ्री पास बनवाने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही फेंसिंग लगाकर लोगों की बटिया, रोड भी बंद कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जिससे स्थानीय/एस्टेट निवासियों में आक्रोश है। उन्होंने कहा कि सारे प्रकरण को जांचने के बाद तथ्यान्वेषी समिति का निष्कर्ष यह है कि राजस ऐरोस्पोर्ट्स एंड एडवेंचर्स कंपनी को बैरियर से अवैध वसूली बंद करनी होगी क्योंकि वह भूमि जहां बैरियर लगा है न पर्यटन विभाग की है न ही राजस कंपनी की। राजस ऐरोस्पोर्ट्स एंड एडवेंचर्स कंपनी पर्यटन विभाग के गेट से ही पर्यटकों से एंट्री फीस ले सकता है। इस अवसर पर कई सदस्य उपस्थित थे।