देहरादून ,
राजधानी में प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर जहां एक ओर विकास की उम्मीदें जताई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल भी उठने लगे हैं। लगभग ₹620 करोड़ की लागत से बनने वाली इस परियोजना का उद्देश्य शहर में ट्रैफिक जाम से राहत दिलाना है, लेकिन इसके साथ ही इसके पर्यावरणीय असर पर बहस तेज हो गई है।
बताया जा रहा है कि इस एलिवेटेड रोड के निर्माण के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की जाएगी, जिससे हरियाली पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों और पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि इससे न केवल वायु गुणवत्ता प्रभावित होगी, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि देहरादून जैसे तेजी से बढ़ते शहर में ट्रैफिक समस्या का समाधान जरूरी है और यह परियोजना उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। हालांकि, उनका भी मानना है कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के संतुलन को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
पर्यावरणविदों ने सुझाव दिया है कि परियोजना के तहत पेड़ों की कटाई के बदले बड़े स्तर पर वृक्षारोपण किया जाए और निर्माण कार्य में आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर पर्यावरणीय नुकसान को कम से कम किया जाए।
सरकार का कहना है कि परियोजना को सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए लागू किया जाएगा और इसके लिए आवश्यक अनुमति भी ली जा रही है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बना रहे।
इस बीच, आम नागरिकों के बीच भी इस परियोजना को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां कुछ लोग इसे शहर के विकास के लिए जरूरी मान रहे हैं, वहीं कई लोग इसके संभावित पर्यावरणीय नुकसान को लेकर चिंतित हैं।