देहरादून ,
गढ़वाल क्षेत्र में शुरू होने वाली चारधाम यात्रा का इंतजार हरिद्वार से लेकर पहाड़ के अंतिम गांव तक बेसब्री से किया जाता है। करीब साढ़े सात हजार करोड़ रुपये के कारोबार वाली यह यात्रा लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देती है।
यात्रा मार्ग पर मौजूद दो हजार से अधिक होटल, हजारों ढाबे, दुकानें और मजदूरों की सालभर की रोजी-रोटी काफी हद तक इसी छह महीने के यात्रा सीजन पर निर्भर रहती है।
लेकिन इस बार यात्रा शुरू होने से पहले ही हालात चिंताजनक नजर आ रहे हैं। बीते साल की तरह इस बार भी व्यवसायियों की उम्मीदों को झटका लग रहा है। जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर दिखाई दे रहा है, वहीं दूसरी ओर यात्रियों की एडवांस बुकिंग लगभग न के बराबर है। जो बुकिंग पहले हो चुकी थी, वह भी तेजी से कैंसिल हो रही है।
इस बीच सबसे बड़ी समस्या रसोई गैस की आपूर्ति बाधित होने से खड़ी हो गई है। व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित होने के कारण होटल और ढाबा संचालकों को वैकल्पिक व्यवस्था की ओर रुख करना पड़ रहा है।
यात्रा मार्ग पर छोटे ढाबा संचालक जंगल से लकड़ी जुटाकर चूल्हा जलाने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि बड़े होटल अब डीजल आधारित भट्टियों का सहारा लेने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर करीब 8 से 10 हजार रुपये की लागत से तैयार हो रही ये डीजल भट्टियां इन दिनों काफी मांग में हैं।
होटल व्यवसायियों का कहना है कि भले ही बुकिंग कैंसिल हो रही हैं, लेकिन जो भी यात्री आएंगे, उन्हें बिना भोजन के लौटाना संभव नहीं है। ऐसे में किसी भी स्थिति में खाना बनाने की व्यवस्था बनाए रखना जरूरी हो गया है।
व्यवसायियों का मानना है कि यदि जल्द ही गैस आपूर्ति की स्थिति सामान्य नहीं हुई और बुकिंग में सुधार नहीं आया, तो इसका सीधा असर चारधाम यात्रा से जुड़े हजारों छोटे-बड़े कारोबारियों की आजीविका पर पड़ सकता है।