देहरादून ,
उत्तराखंड में चार धाम यात्रा के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम में अहम बदलाव किया गया है। अब यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराने वाले श्रद्धालुओं से शुल्क लिया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम फर्जी और अनावश्यक रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है।
कमिश्नर ने दी जानकारी
गढ़वाल मंडल के कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने बताया कि न्यूनतम 10 रुपये शुल्क लेने का सुझाव दिया गया है। अंतिम शुल्क तय करने के लिए गढ़वाल डिवीजन के एडिशनल कमिश्नर की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है। समिति की रिपोर्ट और शासन की मंजूरी के बाद शुल्क की अंतिम दर घोषित की जाएगी।
क्यों लिया गया निर्णय
अधिकारियों के अनुसार बड़ी संख्या में फर्जी और डुप्लीकेट पंजीकरण हो रहे थे, जिससे व्यवस्था प्रभावित होती थी। नाममात्र शुल्क लागू करने से केवल वास्तविक श्रद्धालु ही पंजीकरण कराएंगे और भीड़ प्रबंधन बेहतर होगा।
आस्था का प्रमुख केंद्र है उत्तराखंड
देवभूमि उत्तराखंड देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख तीर्थ स्थल है। यहां स्थित चार धाम—
-
यमुनोत्री मंदिर
-
गंगोत्री मंदिर
-
केदारनाथ मंदिर
-
बद्रीनाथ मंदिर
हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।
कब होती है यात्रा
चार धाम यात्रा आमतौर पर अप्रैल या मई में शुरू होती है और अक्टूबर-नवंबर में शीतकाल शुरू होने पर मंदिरों के कपाट बंद हो जाते हैं।
यात्रा का पारंपरिक क्रम
परंपरा के अनुसार यात्रा घड़ी की दिशा में पूरी की जाती है—
-
यमुनोत्री
-
गंगोत्री
-
केदारनाथ
-
बद्रीनाथ
कई श्रद्धालु दो धाम यात्रा के तहत केवल केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन भी करते हैं।
कठिन लेकिन दिव्य यात्रा
चारों धाम हिमालय की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थित हैं, इसलिए यह यात्रा जितनी आध्यात्मिक मानी जाती है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है। सरकार को उम्मीद है कि नई पंजीकरण व्यवस्था से यात्रा प्रबंधन और अधिक सुचारु होगा।