केदारपुरम का नारी निकेतन बना उम्मीद और नई शुरुआत का प्रतीक, बेसहारा महिलाओं व बच्चों को मिल रहा सम्मानजनक जीवन

देहरादून ,
देहरादून के केदारपुरम क्षेत्र में स्थित राजकीय नारी निकेतन, बालिका निकेतन, बाल गृह एवं शिशु सदन बाहर से भले ही एक साधारण परिसर प्रतीत होता हो, लेकिन भीतर प्रवेश करते ही यह एहसास गहराने लगता है कि यह स्थान केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि टूटे विश्वासों को संजोने, बिखरी जिंदगियों को सहारा देने और नई शुरुआत का साहस जगाने का जीवंत केंद्र है।

यहाँ हर चेहरा एक कहानी कहता है—किसी की आँखों में छूटा हुआ बचपन झलकता है, किसी की खामोशी में पीड़ा की टीस है, तो किसी की मुस्कान में नए जीवन की उम्मीद। यह वह सुरक्षित आश्रय है, जहाँ परित्यक्त और बेसहारा महिलाओं व अनाथ बच्चों को केवल छत ही नहीं, बल्कि अपनापन, सुरक्षा और सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिलता है।

माननीय मुख्यमंत्री की प्रेरणा और देहरादून जिला प्रशासन के संकल्प से इस परिसर को एक संवेदनशील और सुरक्षित स्थान के रूप में विकसित किया गया है। यहाँ महिलाएँ और बच्चे केवल शरण नहीं पाते, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ते हैं। बालिकाओं और शिशुओं के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, संतुलित पोषण, समय पर उपचार, स्वच्छ वातावरण और स्नेहिल देखभाल उन अदृश्य घावों पर मरहम का काम कर रही है, जिन्हें शब्दों में बयां करना कठिन है।

जिलाधिकारी सविन बंसल के सतत प्रयासों से बुजुर्ग महिलाओं के लिए 30 बेड का अतिरिक्त भवन लगभग तैयार हो चुका है। यह भवन जीवन के अंतिम पड़ाव पर अकेली रह गई महिलाओं के लिए सुकून और सम्मान का ठिकाना बनेगा। निकेतन की व्यवस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि कोई भी महिला या बच्चा स्वयं को असुरक्षित या उपेक्षित महसूस न करे।

जिला योजना एवं खनिज न्यास के माध्यम से बजट की व्यवस्था कर निकेतन के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ किया गया है। सीवर लाइन, डोरमेट्री, आवास, स्वच्छता सहित अनेक आवश्यक सुविधाओं का विस्तार किया गया है। वर्तमान में नारी निकेतन में 178 बेसहारा, परित्यक्त एवं शोषित महिलाएँ निवासरत हैं। बालिका निकेतन में 21 बालिकाएँ तथा बाल गृह एवं शिशु सदन में 23 बच्चे रह रहे हैं, जिन्हें शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष देखभाल प्रदान की जा रही है।

बालक एवं बालिका निकेतन में बच्चों को शैक्षणिक शिक्षा के साथ-साथ कंप्यूटर शिक्षा दी जा रही है। वहीं नारी निकेतन की महिलाओं को क्राफ्ट डिजाइन, ऊनी वस्त्रों की कढ़ाई-बुनाई, सिलाई जैसे आजीविकापरक प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। संगीत, वाद्य यंत्र और योग प्रशिक्षण के माध्यम से उनके मानसिक और शारीरिक सशक्तिकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

बालिका निकेतन में बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए खेल मैदान का निर्माण कराया जा रहा है, जहाँ वे खो-खो, कबड्डी, बैडमिंटन और योग जैसी गतिविधियों में प्रशिक्षण ले रही हैं। सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए दो अतिरिक्त होमगार्ड, दो नर्सों की तैनाती तथा डॉक्टरों की नियमित विजिट सुनिश्चित की गई है।

निकेतन परिसर में शौचालय-स्नानागार, डायनिंग एरिया, मंदिर परिसर की ग्रिलिंग, जिम, लॉन्ड्री रूम, रसोई, भवन अनुरक्षण, इन्वर्टर स्थापना सहित अनेक विकास एवं सुदृढ़ीकरण कार्य कराए गए हैं। बच्चों के लिए पर्याप्त रजाइयों, बेड और गद्दों की व्यवस्था की गई है, ताकि वे सुरक्षित और आरामदायक माहौल में रह सकें।

गत दिसंबर माह में निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी सविन बंसल ने इन संस्थानों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता पर पूरा करने का आश्वासन दिया था, जिसका परिणाम आज धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। सरकार और प्रशासन की संवेदनशीलता से योजनाएँ कागज से उतरकर जिंदगियाँ बदल रही हैं। केदारपुरम का यह निकेतन केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि उम्मीद, नई शुरुआत और इंसानियत के जीवित रहने की कहानी है।

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