जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान बना सुशासन का प्रभावी मॉडल, अब तक 4 लाख से अधिक नागरिकों तक पहुंची सरकार

देहरादून ,

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल से संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम के तहत प्रशासन ने सीधे आम नागरिकों तक पहुंच बनाते हुए शासन को वास्तविक रूप से जन-केंद्रित बनाया है। यह अभियान सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित कर प्रदेश में सुशासन, त्वरित सेवा-प्रदान और जनसमस्याओं के समाधान का प्रभावी मॉडल बनकर उभरा है।

20 जनवरी तक राज्य के सभी 13 जनपदों में इस अभियान के अंतर्गत कुल 408 जनसेवा शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। केवल एक ही दिन में 13 नए शिविरों का आयोजन कर सरकार ने अपनी सक्रियता और प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है।

इन शिविरों में अब तक 3,30,461 नागरिकों ने प्रतिभाग किया है, जिनमें से केवल आज 7,876 नागरिकों ने सीधे भाग लिया। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की इस पहल को जनता का व्यापक विश्वास और समर्थन मिल रहा है।

अभियान के माध्यम से अब तक 33,529 शिकायतें एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 22,675 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। केवल आज के दिन ही 783 नए प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जबकि 502 मामलों का समाधान मौके पर अथवा संबंधित विभागों के माध्यम से सुनिश्चित किया गया। यह त्वरित कार्रवाई प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही का प्रमाण है।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रमाण-पत्रों और अन्य शासकीय सेवाओं के लिए कुल 43,975 आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनमें आज 659 नए आवेदन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत अब तक 1,79,169 नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया जा चुका है, जिनमें आज 3,911 नए लाभार्थी जुड़े।

जनपदवार आंकड़े बताते हैं कि देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, नैनीताल सहित सभी पर्वतीय और मैदानी जिलों में इस अभियान को समान उत्साह के साथ अपनाया गया है। शिविरों में आम नागरिकों की बड़ी भागीदारी यह सिद्ध करती है कि यह पहल जनता की वास्तविक जरूरतों से जुड़ी हुई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता के प्रति सरकार की जवाबदेही और संवेदनशीलता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब सरकार स्वयं जनता के पास जाकर उनकी समस्याएं सुनती है और समाधान करती है, तो शासन के प्रति विश्वास स्वतः मजबूत होता है।

उत्तराखंड सरकार का यह अभियान राज्य में सुशासन की नई कार्यसंस्कृति स्थापित कर रहा है, जहां संवाद, समाधान और सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह कार्यक्रम आगे भी और अधिक व्यापक रूप में जारी रहेगा, जिससे उत्तराखंड को जनकल्याण और सुशासन के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित किया जा सके।

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