चमोली ,
हिमालयी क्षेत्र की सबसे पवित्र और ऐतिहासिक यात्राओं में शामिल श्रीनंदा देवी राजजात यात्रा 2026 को स्थगित किए जाने के फैसले ने पूरे क्षेत्र में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस निर्णय के विरोध में चमोली जनपद के 484 गांवों की महापंचायत नंदा नगर ब्लॉक सभागार में आयोजित की गई, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों, धार्मिक संस्थाओं के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एक स्वर में सरकार के फैसले पर नाराजगी जताई।
महापंचायत में वक्ताओं ने कहा कि नंदा देवी राजजात केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि हिमालयी संस्कृति, आस्था और परंपरा का जीवंत प्रतीक है। इसे स्थगित करना क्षेत्र की धार्मिक भावनाओं और सदियों पुरानी परंपराओं के साथ खिलवाड़ है। लोगों ने मांग की कि सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करे और तय समय पर यात्रा का आयोजन सुनिश्चित करे।
गौरतलब है कि श्रीनंदा देवी राजजात यात्रा हर 12 वर्षों में आयोजित की जाती है। यह लगभग 280 किलोमीटर लंबी कठिन पैदल यात्रा होती है, जो करीब 20 दिनों तक चलती है। यात्रा कांसुवा-नौटी से प्रारंभ होकर होमकुंड तक जाती है और पुनः नौटी में ही संपन्न होती है। इस दौरान हजारों श्रद्धालु, साधु-संत और पर्यटक देश-विदेश से यात्रा में शामिल होते हैं।
महापंचायत में यह भी चेतावनी दी गई कि यदि सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ग्रामीणों ने एकजुट होकर कहा कि नंदा देवी राजजात यात्रा उनके अस्तित्व, आस्था और पहचान से जुड़ी है, और इसके साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।