मा0 मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिले के 76 जर्जर स्कूल भवन एक झटके में ध्वस्त होंगे

हजारों नौनिहालों की जीवन सुरक्षा सर्वोपरि, डीएम सख्त
7 दिन में एस्टिमेट तैयार कर ध्वस्तीकरण की स्वीकृति, ₹1 करोड़ की धनराशि स्वीकृत

देहरादून, 
माननीय मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के क्रम में जनपद में वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़े विद्यालय भवनों को लेकर जिला प्रशासन ने पहली बार निर्णायक और ठोस कार्रवाई शुरू कर दी है। बच्चों की जान को जोखिम में डालने वाले 76 जर्जर स्कूल भवनों को एक झटके में ध्वस्त किए जाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नौनिहालों के जीवन से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी जर्जर अथवा निष्प्रोज्य भवन में शिक्षण कार्य संचालित नहीं होने दिया जाएगा।

जिलाधिकारी की सख्ती का असर यह रहा कि महज 10 दिनों के भीतर जनपद के 100 विद्यालयों के जर्जर भवनों की रिपोर्ट प्रशासन को प्राप्त हो गई। रिपोर्ट में देरी को लेकर डीएम ने कड़ा रुख अपनाया था, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने सभी विद्यालयों की सूची विस्तृत रिपोर्ट के साथ सौंप दी।

डीएम के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) को पूर्ण एवं आंशिक निष्प्रोज्य विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण हेतु आंगणन (एस्टिमेट) तैयार करने के आदेश दिए गए थे। इसके लिए ₹1 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है, जिससे ध्वस्तीकरण और सुरक्षा उपायों में किसी प्रकार की देरी न हो।

प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार जनपद में कुल 79 विद्यालयों के भवन पूर्ण रूप से निष्प्रोज्य पाए गए हैं, जिनमें 13 माध्यमिक एवं 66 प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। इनमें से 63 विद्यालयों में छात्रों के पठन-पाठन की वैकल्पिक व्यवस्था पहले ही सुनिश्चित कर दी गई है। शेष 16 विद्यालयों में तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अतिरिक्त 17 विद्यालयों के भवन आंशिक रूप से निष्प्रोज्य घोषित किए गए हैं, जबकि 8 विद्यालय ऐसे पाए गए हैं, जहां ध्वस्तीकरण की आवश्यकता नहीं है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि जिन विद्यालयों के भवन पूर्ण रूप से निष्प्रोज्य हैं, वहां वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित होते ही तत्काल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।

जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से कार्रवाई करेगा। बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और जोखिमपूर्ण भवनों में शिक्षण कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

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