उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मिली गति, सीएम धामी ने उठाए अहम प्रस्ताव

देहरादून ,
उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के माध्यम से बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। राज्य में कुल 3,723 किलोमीटर का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ रहा है। इनमें से लगभग 597 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का डिजाइन और क्रियान्वयन एनएचएआई द्वारा किया गया है, जिनमें से 336 किलोमीटर से अधिक परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि लगभग 193 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिसकी अनुमानित लागत 15,890 करोड़ रुपये से अधिक है।

चारधाम यात्रा को सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय राजमार्गों पर 12,769 करोड़ रुपये की लागत से चारधाम महामार्ग परियोजना स्वीकृत की गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने ऋषिकेश बाईपास, अल्मोड़ा–दन्या–पनार–घाट मार्ग, ज्योलिकोट–खैरना–गैरसैंण–कर्णप्रयाग मार्ग और अल्मोड़ा–बागेश्वर–कांडा–उडियारी बैंड मार्ग सहित राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को प्रमुखता से रखते हुए केंद्र सरकार से स्वीकृति का अनुरोध किया।

ऋषिकेश बाईपास परियोजना के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-07 पर तीनपानी से योगनगरी होते हुए खारास्रोत तक 12.67 किलोमीटर लंबाई में चार लेन बाईपास का निर्माण प्रस्तावित है, जिसकी अनुमानित लागत 1,161.27 करोड़ रुपये है। इस परियोजना में तीन हाथी कॉरिडोर हेतु 4.876 किमी एलिवेटेड मार्ग, चंद्रभागा नदी पर 200 मीटर लंबा पुल तथा रेलवे पोर्टल पर 76 मीटर लंबाई का आरओबी शामिल है। इसके अतिरिक्त श्यामपुर रेलवे क्रॉसिंग पर 318 करोड़ रुपये की लागत से आरओबी निर्माण का प्रस्ताव है।

अल्मोड़ा–दन्या–पनार–घाट मार्ग (एनएच-309बी) के 76 किलोमीटर हिस्से को 988 करोड़ रुपये की लागत से दो लेन चौड़ा करने का प्रस्ताव है।
ज्योलिकोट–खैरना–गैरसैंण–कर्णप्रयाग मार्ग (एनएच-109) के अंतर्गत 235 किलोमीटर लंबाई में दो लेन चौड़ीकरण का संरेखण प्रस्तावित है।
वहीं अल्मोड़ा–बागेश्वर–कांडा–उडियारी बैंड मार्ग (एनएच-309ए) के पैकेज 1, 2 और 5 में कुल 84.04 किलोमीटर लंबाई में 1,001.99 करोड़ रुपये की लागत से कार्य प्रस्तावित हैं। कांडा से बागेश्वर खंड के लिए वनभूमि हस्तांतरण को भारत सरकार की स्वीकृति मिल चुकी है।

राज्य में काशीपुर–सितारगंज (77 किमी), रुद्रपुर–काठगोदाम (50 किमी) और हरिद्वार–नगीना (67 किमी) जैसे चार-लेन कॉरिडोर से औद्योगिक क्षेत्रों, कृषि मंडियों और पर्यटन स्थलों तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
दिल्ली–देहरादून कॉरिडोर के अंतर्गत गणेशपुर–देहरादून खंड में लगभग 30 किलोमीटर लंबा छह लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे विकसित किया गया है, जिसमें सुरंग और 18 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन शामिल है। इस परियोजना पर 1,995 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है।

इसके अतिरिक्त देहरादून बाईपास (12 किमी, 716 करोड़ रुपये) और हरिद्वार बाईपास (15 किमी, 1,603 करोड़ रुपये) जैसी परियोजनाएं शहरी क्षेत्रों में यातायात दबाव कम करने में सहायक सिद्ध होंगी।
भारत–नेपाल सीमा पर बनबसा आईसीपी कनेक्टिविटी को 4 किलोमीटर लंबाई और 366 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है।

भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मसूरी–देहरादून कनेक्टिविटी, हरिद्वार–हल्द्वानी हाई-स्पीड कॉरिडोर, ऋषिकेश बाईपास, देहरादून रिंग रोड और लालकुआं–हल्द्वानी–काठगोदाम बाईपास जैसी परियोजनाएं डीपीआर और तैयारी चरण में हैं।

वहीं सिलक्यारा–पोलगांव सुरंग परियोजना में सिविल कार्य लगभग 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। सुरंग के बीच दीवार निर्माण कार्य अगले पांच–छह महीनों में पूरा किया जाएगा, जिसके बाद इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल कार्य शुरू होंगे। परियोजना को मार्च 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

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