देहरादून ,
मैक्स हॉस्पिटल, देहरादून ने ट्रांस-एक्सिलरी मिनिमली इनवेसिव एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD) क्लोज़र कर बड़ी चिकित्सीय उपलब्धि हासिल की है। दिल की गंभीर बीमारियों के लिए यह एक अत्याधुनिक हार्ट सर्जरी तकनीक है, जिसमें पारंपरिक हार्ट सर्जरी के मुकाबले कम दर्द, कम रक्तस्राव और तेज़ रिकवरी के लाभ मिलते हैं।
32 वर्षीय मरीज पर यह प्रोसीजर बांह के नीचे एक छोटे से चीरे के माध्यम से किया गया, जिससे मरीज को छाती की हड्डी कटवाने जैसी पारंपरिक सर्जरी से गुजरना नहीं पड़ा।
मरीज रूपेंद्र चौहान जन्मजात हार्ट डिफेक्ट के साथ जी रहे थे और हाल ही में उन्हें रोजमर्रा के कामों के दौरान सांस लेने में दिक्कत होने लगी। जांच में पता चला कि उनके दिल की दीवार में बड़ा ASD (छेद) मौजूद है, साथ ही एन्यूरिज्मल सेप्टल टिशू भी था, जो स्थिति को और जटिल बना रहा था।
कार्डियक सर्जरी (CTVS), वैस्कुलर सर्जरी और कार्डियोलॉजी के विज़िटिंग कंसल्टेंट डॉ. रवि कुमार सिंह की टीम ने स्थिति का मूल्यांकन कर मिनिमली इनवेसिव ट्रांस-एक्सिलरी तकनीक से सर्जरी करने का निर्णय लिया।
डॉ. सिंह ने बताया,
“यह तकनीक पारंपरिक स्टर्नीटॉमी से बचाती है और छोटे चीरे के माध्यम से सर्जरी कर रिकवरी को तेज़ बनाती है। इससे मरीज को कम दर्द होता है, खून की कमी कम होती है और वह जल्दी सामान्य गतिविधियों में लौट सकता है।”
सर्जरी के केवल तीसरे दिन ही मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वह पूरी तरह स्थिर था और इतनी सहज अवस्था में था कि खुद कार चलाकर घर जा सका। डॉक्टरों के अनुसार, ऐसी तकनीकें विशेष रूप से युवा मरीजों के लिए गेम चेंजर साबित हो रही हैं।
हालांकि ASD आम समस्या नहीं है और इस उन्नत ट्रांस-एक्सिलरी मिनिमली इनवेसिव तकनीक से इसका उपचार अभी भी चुनिंदा केंद्रों में ही उपलब्ध है, लेकिन मैक्स हॉस्पिटल देहरादून ने इसे सफलतापूर्वक पूरा कर क्षेत्र के मरीजों को अत्याधुनिक कार्डियक केयर उपलब्ध कराने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।