शीतकाल में भालू प्री-हाइबरनेशन अवधि के कारण अधिक सक्रिय हो जाते हैं, ऐसे में मानव-भालू संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ी नाराजगी जताई है। सीएम ने वन विभाग को तुरंत प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। इसके बाद प्रमुख सचिव वन आर.के. सुधांशु ने वन अधिकारियों और जिला प्रशासन के साथ समीक्षा बैठक की, जिसमें संघर्ष रोकने के उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई।
कचरा प्रबंधन पर सख्ती
प्रमुख सचिव ने कहा कि घरों और आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास जमा कूड़ा भालुओं को आकर्षित करता है। इसीलिए जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए कि—
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जन जागरूकता अभियान चलाएं
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कचरे का जैविक तरीक़े से निस्तारण सुनिश्चित करें
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कचरे वाले स्थानों पर केरोसिन या फिनाइल डालकर भालुओं के आने की संभावना कम की जाए
उन्होंने कहा कि कूड़ा निस्तारण न करने वाले अधिकारियों पर नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाए।
सुरक्षा उपाय व राहत प्रबंधन
बैठक में बताया गया कि शीतकाल में भालू अधिक सक्रिय रहते हैं, इसलिए सतर्कता बढ़ाना आवश्यक है। प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि—
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किसी भी घटना की सूचना मिलते ही संबंधित डीएफओ तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे
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भालू हमले के पीड़ितों को तुरंत मुआवजा दिया जाए
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मुआवजा राशि उपलब्ध न होने पर जिलाधिकारी अनटाइड फंड से तत्काल भुगतान करें
उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जमीन पर लागू किए जाने वाले आवश्यक निर्देश
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आबादी वाले क्षेत्रों में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था
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लोगों को मजबूत बाड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित करना
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घरों और गौशालाओं के आसपास झाड़ियों की नियमित सफाई
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संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन से निगरानी
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ज्ञात वासस्थलों की सुरक्षा
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पैदल गश्त बढ़ाई जाए और समूह में की जाए
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दीर्घकालिक उपायों के रूप में भालू प्रभावित क्षेत्रों में पौधरोपण

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