उत्तराखंड बना खेल और पर्यावरण संरक्षण का अग्रदूत – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी – uttarakhandawaaz.in

उत्तराखंड बना खेल और पर्यावरण संरक्षण का अग्रदूत – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

दून में अखिल भारतीय वन खेलकूद प्रतियोगिता 2025 का शुभारंभ

देहरादून ,

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज, रायपुर (देहरादून) में आयोजित अखिल भारतीय वन खेलकूद प्रतियोगिता 2025 का उद्घाटन किया।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, सांसद नरेश बंसल एवं श्रीमती कल्पना सैनी, विधायक उमेश शर्मा ‘काउ’, खजान दास, सविता कपूर, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु और प्रमुख वन संरक्षक सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।


🏆 42 टीमें, 3390 खिलाड़ी, 700 महिला प्रतिभागी

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रतियोगिता में देशभर के 42 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 3390 खिलाड़ी, जिनमें 700 से अधिक महिला प्रतिभागी, हिस्सा ले रही हैं।
उन्होंने कहा —

“खेल केवल शारीरिक तंदुरुस्ती का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास और राष्ट्र निर्माण का भी आधार हैं।”


🌱 खेल संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का संगम

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वन कर्मियों के लिए फिट रहना आवश्यक है क्योंकि वे “वन और पर्यावरण के सच्चे प्रहरी” हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ वन संपदा के संरक्षण हेतु भी लगातार कार्य कर रही है।

“खेल वन और ग्रीन गेम्स से उत्तराखंड आज खेल और हरित चेतना का प्रतीक बन गया है।”


🏅 खिलाड़ियों के लिए नई सुविधाएं और सम्मान

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में:

  • 8 शहरों में 23 खेल अकादमियां संचालित की जा रही हैं।

  • एक राज्य खेल विश्वविद्यालय और महिला स्पोर्ट्स कॉलेज की स्थापना की जा रही है।

  • राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता खिलाड़ियों को ‘आउट ऑफ टर्न’ नियुक्ति दी जा रही है।

  • उत्कृष्ट खिलाड़ियों को ₹50 लाख तक की सम्मान राशि दी जा रही है।

उन्होंने हाल ही में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य व उत्तराखंड की बेटी स्नेहा राणा को ₹50 लाख की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की।


🌳 ग्रीन गेम्स और ‘खेल वन’ की अनूठी पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों को उत्तराखंड ने ‘ग्रीन गेम्स’ की थीम पर आयोजित किया था।
2.77 हेक्टेयर भूमि पर ‘खेल वन’ विकसित किया गया है, जहाँ पदक विजेताओं के नाम पर 1600 से अधिक रुद्राक्ष वृक्ष लगाए गए हैं।

“यह स्थल खेल उत्कृष्टता और हरित चेतना दोनों का प्रतीक बनेगा।”


🐅 वन्यजीव संरक्षण में आधुनिक तकनीक

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य का लगभग 71% क्षेत्र वनाच्छादित है — जो इसे ‘ऑक्सीजन बैंक’ और ‘वाटर टॉवर ऑफ इंडिया’ बनाता है।
राज्य में 6 राष्ट्रीय उद्यान, 7 वन्यजीव विहार और 4 संरक्षण आरक्षित क्षेत्र हैं।
वन्यजीव संरक्षण हेतु:

  • GPS ट्रैकिंग, ड्रोन सर्विलांस और डॉग स्क्वॉड की मदद ली जा रही है।

  • मानव-वन्यजीव संघर्ष में मुआवजा राशि ₹6 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख कर दी गई है।


🌄 युवा उद्यमिता और इको-टूरिज्म

मुख्यमंत्री ने “सीएम यंग ईको-प्रिन्योर योजना” का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं को नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, ट्रेकिंग गाइड और इको-टूरिज्म उद्यमी के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
साथ ही, “कैन्टर राइड” जैसी योजनाओं से स्थानीय समुदायों को वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन से जोड़ा जा रहा है।
कॉर्बेट में ‘वन्यजीवों का एम्स’ कहे जाने योग्य एक आधुनिक रेस्क्यू सेंटर भी स्थापित किया गया है।

उन्होंने हल्द्वानी जू सफारी परियोजना और उत्तरकाशी स्नो लेपर्ड कंज़र्वेशन सेंटर को शीघ्र स्वीकृति देने का आग्रह केंद्र सरकार से किया।


🌼 ‘एक पेड़ माँ के नाम’ – एक भावनात्मक संदेश

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अभियान “एक पेड़ माँ के नाम” को आगे बढ़ाते हुए कहा —

“यदि आप इस स्टेडियम परिसर में अपनी माता जी के नाम एक पौधा लगाएंगे, तो यह माँ के प्रति प्रेम और सम्मान का प्रतीक होगा।”

उन्होंने खिलाड़ियों से आह्वान किया कि वे खेल भावना के साथ-साथ हरित उत्तराखंड निर्माण के भी अग्रदूत बनें।


“आप सभी अपने परिश्रम से न केवल राज्य का गौरव बढ़ा रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरित, स्वस्थ और सशक्त उत्तराखंड का निर्माण कर रहे हैं।”
— मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 🌿

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