कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति
देहरादून ,
यह मामला देहरादून के धनौला गांव में सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिबंधित गोल्डन फॉरेस्ट और सरकारी भूमि की कथित अवैध बिक्री से जुड़ा है। शिकायतकर्ता शाकुल उनियाल ने आरोप लगाया कि कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से आम लोगों को यह भूमि बेची जा रही है। उन्होंने पहली शिकायत 1 फरवरी 2021 को जिलाधिकारी और आयुक्त गढ़वाल को दी थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मुख्य घटनाक्रम:
- 📝 शिकायतें और अनदेखी: शाकुल ने कई बार शिकायत की, लेकिन प्रशासन ने उन्हें नजरअंदाज किया। बाद में एक अन्य व्यक्ति की शिकायत पर एसआईटी (भूमि) को जांच सौंपी गई।
- 🔍 एसआईटी की पुष्टि: 12 अप्रैल 2024 को एसआईटी ने फर्जीवाड़े की पुष्टि की और तत्कालीन महानिरीक्षक निबंधन संदीप श्रीवास्तव को FIR दर्ज करने की सिफारिश की।
- 📩 जांच की संस्तुति: 2 जुलाई 2024 को महानिरीक्षक ने एसएसपी देहरादून को पत्र भेजा, लेकिन FIR दर्ज नहीं हुई।
- ⚖️ अदालत का हस्तक्षेप: शाकुल ने 27 अगस्त 2025 को फिर शिकायत की और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 175(3) के तहत अदालत से जांच का आदेश मांगा।
- 👩⚖️ न्यायिक निर्देश: तृतीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट साहिस्ता बानों ने स्पष्ट किया कि अपराध की जानकारी रखने वाला कोई भी व्यक्ति शिकायत दर्ज करा सकता है। उन्होंने संज्ञेय अपराध के तहत FIR दर्ज कर गहन विवेचना का आदेश दिया।
आरोपी व्यक्तियों:
- भरत सिंह नेगी
- प्रशांत डोभाल
- राजीव तलवार
- मनोरमा डोभाल
- नीरू तलवार
पुलिस की भूमिका:
- पुलिस ने शिकायतकर्ता शाकुल को इस मामले से असंबंधित बताया और उनकी शिकायत पर कार्यवाही नहीं की।
- अदालत ने पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाए और स्पष्ट निर्देश दिए कि संज्ञेय अपराध की जानकारी होने पर FIR दर्ज करना अनिवार्य है।
यह मामला न केवल भूमि फर्जीवाड़े का है, बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता और न्यायिक हस्तक्षेप का भी उदाहरण है। यदि आप चाहें, मैं इस विषय पर एक औपचारिक रिपोर्ट या प्रेस विज्ञप्ति का प्रारूप भी तैयार कर सकता हूँ।
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