आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर में बच्चों को संगीत, योग और खेल से जोड़ा गया
सड़क पर बिखरा बचपन अब शिक्षा की राह पर
देहरादून,
देहरादून जिला प्रशासन ने बाल संरक्षण और भिक्षावृत्ति उन्मूलन की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाया है। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशन में “भिक्षा से शिक्षा” अभियान के तहत सड़क पर जीवन बिता रहे बच्चों को रेस्क्यू कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। इस पहल के अंतर्गत साधूराम इंटर कॉलेज, राजा रोड देहरादून में एक आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर स्थापित किया गया है, जहाँ इन बच्चों को संगीत, योग, खेल और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा की ओर प्रेरित किया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में जिला बाल संरक्षण इकाई देहरादून की जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति (DCWPC), बाल कल्याण समिति (CWC), चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 तथा बाल भिक्षावृत्ति निवारण प्रयास/इंटेंसिव केयर सेंटर की त्रैमासिक बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में उन्होंने बालगृहों में निवासरत बच्चों के आधार, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड और स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर को बालगृहों में जाकर बच्चों के आधार कार्ड अपडेट या नए बनाने के लिए विशेष शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। साथ ही पुलिस को बालगृहों में तैनात कार्मिकों का थानेवार रैंडम सत्यापन करने और अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को 10 दिन के भीतर सभी संस्थानों में आरबीएसके टीम भेजकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
भिक्षा से शिक्षा अभियान की उपलब्धियाँ
जिला प्रशासन की टीम अब तक दो चरणों में कुल 82 बच्चों को रेस्क्यू कर स्कूलों में दाखिला दिला चुकी है। पहले चरण में 51 बच्चों को विभिन्न स्कूलों में और दूसरे चरण में 31 बच्चों को राजकीय प्राथमिक विद्यालय परेड ग्राउंड व साधूराम इंटर कॉलेज में प्रवेश दिलाया गया। इन बच्चों के लिए डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से साधूराम इंटर कॉलेज में आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है।
बैठक में यह भी बताया गया कि जुलाई से सितंबर 2025 के बीच बाल संरक्षण समिति के समक्ष 136 बच्चों को देखभाल और संरक्षण हेतु प्रस्तुत किया गया, जबकि 138 बच्चों को मुक्त किया गया। भिक्षावृत्ति में संलिप्त 70 और बालश्रम में शामिल 14 बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जबकि अन्य राज्यों के 6 बच्चों को उनके परिजनों के पास भेजा गया।
भिक्षावृत्ति उन्मूलन के लिए जिला प्रशासन ने अंतरविभागीय टीम और 3 रेस्क्यू वाहनों की तैनाती की है जो निरंतर शहर में पेट्रोलिंग कर जरूरतमंद बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। इस टीम में होमगार्ड, चाइल्ड हेल्पलाइन, शिक्षा विभाग, श्रम विभाग, पुलिस और कई गैर-सरकारी संस्थाएँ शामिल हैं।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी सविन बंसल ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि बालगृहों में निवासरत अनाथ बच्चों के दस्तावेजों से जुड़ी कठिनाइयों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए, ताकि हर बच्चा सरकारी योजनाओं और शिक्षा के अवसरों का लाभ उठा सके।
“भिक्षा से शिक्षा”—देहरादून प्रशासन की यह पहल न केवल बाल संरक्षण की दिशा में एक सशक्त कदम है, बल्कि समाज में संवेदनशील परिवर्तन का उदाहरण भी बन रही है।
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