कॉलेज प्रबंधन के पक्ष में निर्णय — खेल मैदान पर रहेगा एसजीआरआर का स्वामित्व
देहरादून ,
भोगपुर स्थित श्री गुरु राम राय इंटर कॉलेज (एसजीआरआर) से जुड़ी खेल भूमि के स्वामित्व विवाद पर अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कॉलेज प्रबंधन के पक्ष में निर्णय दिया है।
सिविल जज (जूनियर डिविजन), ऋषिकेश की अदालत ने इस मामले में पूर्व डीजीपी प्रेमदत्त रतूड़ी द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों और दलीलों को अस्वीकार करते हुए यह स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि एसजीआरआर इंटर कॉलेज भोगपुर की ही संपत्ति है तथा खेल मैदान का संचालन कॉलेज प्रबंधन के अधीन रहेगा।
⚖️ न्यायालय का निर्णय
अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि रतूड़ी पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य और दस्तावेज़ कानूनी रूप से प्रमाणित नहीं हैं तथा कॉलेज प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ वैध और ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित हैं।
इस आधार पर न्यायालय ने कहा कि “उक्त भूमि का स्वामित्व श्री गुरु राम राय इंटर कॉलेज भोगपुर के पास रहेगा और खेल मैदान का संचालन वही करेगा।”
🏫 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि वर्ष 1950 में श्री गुरु राम राय दरबार साहिब द्वारा ग्रामीण एवं निर्धन छात्रों को शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भोगपुर में यह विद्यालय स्थापित किया गया था।
तत्कालीन समय में लगभग 11.5 बीघा भूमि प्रेमदत्त रतूड़ी के पूर्वजों ने दानस्वरूप विद्यालय को दी थी। इसी भूमि पर पिछले 75 वर्षों से खेल मैदान संचालित है, जो विद्यालय की खेलकूद, परेड और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है।
⚠️ विवाद और अदालत तक पहुँचा मामला
विवाद तब उत्पन्न हुआ जब पूर्व डीजीपी प्रेमदत्त रतूड़ी ने कुछ भू-माफियाओं के साथ मिलकर भूमि पर कब्ज़े का प्रयास किया।
विद्यालय प्रबंधन और श्री दरबार साहिब की संगत ने इसका विरोध करते हुए मामला न्यायालय में दायर किया।
सुनवाई के दौरान एसजीआरआर प्रबंधन ने सभी कानूनी दस्तावेज़, दानपत्र और रिकॉर्ड अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर कोर्ट ने पाया कि रतूड़ी पक्ष के दावे निराधार हैं।
🌿 समाज में संतोष और हर्ष का माहौल
न्यायालय के इस निर्णय से विद्यालय परिवार, स्थानीय जनता और क्षेत्र के शिक्षाविदों में खुशी और संतोष का माहौल है।
विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि “अदालत का यह फैसला सत्य और न्याय की जीत है। कुछ असामाजिक तत्व अभी भी भ्रामक सूचनाएँ फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जनता को सत्य तथ्यों पर भरोसा रखना चाहिए।”
✍️ निष्कर्ष
इस ऐतिहासिक निर्णय ने न केवल एसजीआरआर संस्थान की प्रतिष्ठा और अधिकारों की रक्षा की है, बल्कि समाज में कानूनी प्रक्रिया और सत्य की विजय का सशक्त संदेश भी दिया है।