प्रदेशवासियों को फिलहाल बड़ी राहत — यूआरसीसी ने यूपीसीएल की 674.77 करोड़ की मांग खारिज की

देहरादून, 
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूआरसीसी) ने उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) की उस पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें निगम ने 674.77 करोड़ रुपये की कैरिंग कॉस्ट उपभोक्ताओं से वसूलने की मांग की थी। आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि टैरिफ पर किसी भी तरह का अतिरिक्त बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा।

आयोग की पीठ, जिनमें अध्यक्ष एम.एल. प्रसाद और सदस्य विधि अनुराग शर्मा शामिल थे, ने कहा कि यूपीसीएल ने 11 अप्रैल 2024 को जारी अपने टैरिफ आदेश के खिलाफ पुनर्विचार के लिए जो अपील दायर की थी, उसमें पुनर्विचार के लिए कोई नया तथ्य या वैध आधार प्रस्तुत नहीं किया गया है। आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि पांच अगस्त को आयोजित जनसुनवाई में हितधारकों ने निगम की मांग पर कड़ा विरोध जताया था, इसलिए याचिका को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया गया।

डीपीएस को टैरिफ का हिस्सा माना गया

यूपीसीएल का तर्क था कि 129.09 करोड़ रुपये के डिले पेमेंट सरचार्ज (डीपीएस) को टैरिफ में शामिल न किया जाए क्योंकि वर्ष 2012 में राज्य सरकार ने डीपीएस वसूलने से अस्वीकृति का निर्णय लिया था। आयोग ने इस दावे को मान्यता नहीं दी और स्पष्ट किया कि चाहे सरकार हो या उपभोक्ता, सभी पर समान नियम लागू होंगे — इसलिए डीपीएस को टैरिफ का हिस्सा माना जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा।

अगले तीन वर्षों के लिए बिजनेस प्लान मंजूर — लाइन लॉस में कटौती का निर्देश

आयोग ने यूपीसीएल के आगामी तीन वर्षों के बिजनेस प्लान पर भी निर्णय लिया और निगम को तकनीकी व वाणिज्यिक (टेक्निकल & कॉमर्शियल) नुकसान घटाने के लिए कड़े लक्ष्य दिए:

  • 2025–26: यूपीसीएल का अनुमान — 13.50%; आयोग ने स्वीकृत किया — 12.75%

  • 2026–27: यूपीसीएल का अनुमान — 13.21%; आयोग ने स्वीकृत किया — 12.25%

  • 2027–28: यूपीसीएल का अनुमान — 12.95%; आयोग ने स्वीकृत किया — 11.75%

यह आदेश निगम पर स्पष्ट संकेत है कि अगले तीन वर्षों में यूपीसीएल को लाइन-लॉस को 11.75% तक लाने के लिए कठोर कदम उठाने होंगे।

पिछले वर्षों में लक्ष्य से पीछे रही यूपीसीएल

आयोग ने यह भी रिकार्ड किया कि यूपीसीएल पिछले तीन वित्तीय वर्षों में अपने लक्ष्यों की तुलना में नुकसान घटाने में सफल नहीं रहा:

  • 2021–22: लक्ष्य 13.75% — वास्तविक 14.70%

  • 2022–23: लक्ष्य 13.50% — वास्तविक 16.39%

  • 2023–24: लक्ष्य 13.25% — वास्तविक 15.63%

इन आंकड़ों के आधार पर आयोग ने कहा कि निगम द्वारा प्रस्तुत योजना में ठोस सुधार और व्यावहारिक रणनीतियों का अभाव दिखा, इसलिए अनुरोध किए गए अतिरिक्त आर्थिक बोझ को मान्यता नहीं दी जा सकती।

आयोग का रुख और उपभोक्ता हित

यूआरसीसी ने स्पष्ट किया है कि नियमन का प्राथमिक उद्देश्य उपभोक्ता हित पर संरक्षण सुनिश्चित करना है। आयोग के अनुसार, यदि निगम के प्रदर्शन में सुधार लाने और नुकसान कम करने के ठोस प्रयास दिखाई देते हैं तो नियमन के ढांचे के भीतर अन्य व्यवस्थाएँ परखी जाएँगी; परन्तु फिलहाल किसी भी तरह की अतिरिक्त लागत उपभोक्ता पर डालना न्यायसंगत नहीं माना गया।

क्या आगे हो सकता है — संभावित कदम

अब यूपीसीएल के समक्ष यह चुनौती है कि वह तकनीकी सुधार, सिस्टम मॉडर्नाइज़ेशन, वितरण नेटवर्क की संवर्द्धन, मीटरिंग व बिलिंग सुधार तथा चोरी और वाणिज्यिक नुकसान घटाने हेतु ठोस रणनीति अपनाए। आयोग भी समय-समय पर प्रगति की समीक्षा करता रहेगा और दिए गए लक्ष्यों के अनुपालन को प्राथमिकता देगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *