नेहरू कालोनी से लापता 2 नाबालिगों को 24 घंटे में दिल्ली से सुरक्षित बरामद
देहरादून,
नेहरू कॉलोनी इलाके से गत 04 सितंबर की रात लापता हुए दो नाबालिग बच्चों को देहरादून पुलिस की तेजी और राज्य-स्तरीय समन्वय के चलते 24 घंटे के अंदर दिल्ली के पहाड़गंज रेलवे स्टेशन से सकुशल बरामद कर परिजनों के हवाले कर दिया गया। यह बचाव कार्य महिला व बाल सुरक्षा के प्रति पुलिस की सजगता और त्वरित कार्रवाई का उदाहरण बताया जा रहा है।
घटना का संक्षेप और त्वरित सूचना
जानकारी के अनुसार 04-09-2025 की रात्रि को नेहरू कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति ने थाना नेहरू को सूचना दी कि उसकी नाबालिग पुत्री (11 वर्ष) तथा उनके पड़ोसी का एक 10 वर्ष का नाबालिग लड़का बिना बताए घर से निकल गए हैं। परिवार द्वारा घर में खोजबीन की गई पर बच्चों का कहीं पता नहीं चला। घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने तत्काल निगरानी सतह पर रखते हुए थाना नेहरू कॉलोनी को बच्चों की तलाश के निर्देश दिए और एक विशेष पुलिस टीम गठित की गई।
जांच की रणनीति और समन्वय
थाना टीम ने सबसे पहले बच्चों के घर व आस-पास स्थापित सीसीटीवी फुटेज की जांच की तथा घटनास्थल व संभावित मार्गों का सर्वे किया गया। पुलिस ने बच्चों की तस्वीरें और विवरण सोशल मीडिया व अन्य संचार माध्यमों के जरिए आस-पास के जिलों और पड़ोसी राज्यों में प्रसारित कर दिए। साथ ही बच्चों के मित्रों, परिचितों व स्थानीय दुकानदारों से भी पूछताछ कर संभावित सुराग जुटाए गए।
इसी समन्वय का नतीजा रहा कि पुलिस को सूचना मिली कि बच्चे संभवत: रेलवे मार्ग से दिल्ली की ओर चले गए हैं। तत्काल इसके बाद देहरादून पुलिस ने दिल्ली पुलिस—विशेषकर थाना पहाड़गंज—से संपर्क स्थापित किया और दोनों पुलिस बलों के मिलकर प्रयास के चलते बच्चे पहाड़गंज रेलवे स्टेशन से खोजे गए।
बरामदगी और किशोरों का बयान
पुलिस ने बताया कि बच्चों को सुरक्षित हालत में बरामद कर परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। पूछताछ में बच्चों ने कहा कि वे दिल्ली घूमने जाना चाहते थे। उन्होंने बताया कि वे मसूरी एक्सप्रेस देखते हुए उसमें सवार हो गए और बिना किसी को बताये दिल्ली तक चले गए। पुलिस ने प्राथमिक बयान रिकॉर्ड किया और बच्चों को मानसिक व शारीरिक रूप से ठीक पाया गया।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया एवं पुलिस की कार्यप्रणाली
एसएसपी देहरादून के निर्देश पर गठित टीम की सक्रियता को प्रशंसा मिली है। स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई, सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण और राज्य-स्तरीय समन्वय अत्यंत जरूरी होता है—और इस मामले में यही उपाय बच्चों की सुरक्षित बरामदगी में कारगर साबित हुए। पुलिस ने यह भी कहा कि बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ उनके मानसिक कल्याण का ध्यान रखते हुए आवश्यक संवैधानिक प्रक्रियाएँ अपनाई गईं और परिजनों को बच्चों की स्थिति के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई।
परिवार और समुदाय की प्रतिक्रिया
परिजन और पड़ोसी घटना की जानकारी पाकर चिंतित थे। बच्चों की बरामदगी के बाद परिजन भावुक हुए और उन्होंने पुलिस की तत्परता के लिए आभार व्यक्त किया। समुदाय के लोगों ने भी कहा कि ऐसे मामलों में सूचना तंत्र तेज होना चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत पुलिस को सूचित किया जाना चाहिए।
बाल सुरक्षा के संदर्भ में सिफारिशें और पुलिस की अपील
पुलिस ने अभिभावकों से आग्रह किया है कि वे बच्चों पर नजर रखें, विशेषकर नाबालिगों के मोबाइल, सोशल मीडिया उपयोग और बाहर जाने की आदतों पर नियंत्रण रखें। साथ ही निर्देश दिए गए कि:
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यदि कोई बच्चा अचानक लापता हो तो सबसे पहले स्थानीय थाना में रिपोर्ट करें और समय न गंवाएँ;
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आसपास के सीसीटीवी फुटेज व परिचितों से तुरंत जानकारी जुटाने में पुलिस का सहयोग करें;
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स्कूलों व सामुदायिक संगठनों के माध्यम से बच्चों में सुरक्षित यात्रा और खुद की सुरक्षा के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाए।
पुलिस ने आमजन से भी अपील की कि किसी भी लापता नाबालिग की सूचना मिलते ही तत्क्षण सूचना दें, क्योंकि शुरुआती कुछ घंटे किसी भी खोज अभियान की सफलता के लिए निर्णायक होते हैं।
निष्कर्ष — सतर्कता और त्वरित समन्वय की जरूरत
यह घटना दर्शाती है कि सतर्कता, सूचना का त्वरित आदान-प्रदान और राज्य-स्तरीय पुलिस समन्वय से नाबालिगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। देहरादून पुलिस की तत्काल कार्यवाही और दिल्ली पुलिस के सहयोग ने दो नाबालिगों को सुरक्षित घर पहुंचाया; पर यह भी स्पष्ट है कि अभिभावकों, समुदाय और प्रशासन के बीच निरन्तर संवाद व जागरूकता ही ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने में सक्षम होगा।