देहरादून,
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की राजनीति और प्रशासन में बड़े फैसले लेते हुए हिन्दुत्व आधारित शासन मॉडल को नई धार दी है। सरकार ने ऑपरेशन कालनेमि, धर्मांतरण विरोधी कानून में संशोधन, और मदरसा बोर्ड समाप्ति जैसे अहम कदम उठाए हैं। इसे पहली बार आरएसएस के कोर एजेंडे पर चल रही सरकार के रूप में देखा जा रहा है, जिसे भाजपा शासित अन्य राज्यों के लिए गवर्नेंस मॉडल माना जा सकता है।
🔹 ऑपरेशन कालनेमि
धामी के निर्देश पर पुलिस द्वारा संचालित इस अभियान के तहत अब तक 4 हजार से अधिक संदिग्धों का सत्यापन किया जा चुका है। इनमें से 300 से अधिक लोग गिरफ्तार हुए हैं, जिनमें एक बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल है।
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हरिद्वार में 162 गिरफ्तारियां हुईं।
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देहरादून में धार्मिक चोला पहनकर छिपा एक बांग्लादेशी पकड़ा गया।
जनसामान्य ने इस अभियान को सनातन आस्थाओं के संरक्षण का ठोस कदम बताया है।
🔹 अवैध धर्मांतरण पर सख्ती
विधानसभा ने उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2025 पारित कर दिया है।
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शादी के बहाने धर्म छिपाने पर 3 से 10 साल की सजा और 3 लाख रुपये जुर्माना।
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महिला, बच्चा, एससी-एसटी, दिव्यांग या सामूहिक धर्मांतरण पर अधिकतम 14 साल की जेल।
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विदेशी धन लेकर धर्मांतरण कराने पर 7 से 14 साल की जेल और न्यूनतम 10 लाख का जुर्माना।
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भय दिखाकर धर्मांतरण पर 20 साल से आजीवन कारावास।
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धर्म परिवर्तन से अर्जित संपत्ति जिला मजिस्ट्रेट जब्त कर सकेगा।
🔹 अल्पसंख्यक संस्थान विधेयक और मदरसा बोर्ड समाप्त
गैरसैंण सत्र में पारित अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान विधेयक, 2025 के तहत अब केवल मुस्लिम ही नहीं बल्कि सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी समुदायों को भी अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा मिल सकेगा।
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यह देश का पहला कानून है जो मुस्लिम समुदाय के एकाधिकार को खत्म करता है।
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इसके साथ ही कैबिनेट ने उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2016 और अरबी-फारसी मदरसा मान्यता नियम, 2019 को 1 जुलाई 2026 से निरस्त करने का निर्णय लिया है।
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राज्य में अब उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण गठित होगा।
👉 इन तीन बड़े निर्णयों के बाद धामी सरकार का हिन्दुत्व आधारित प्रशासन मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।