एसटीएफ ने किया फर्जी वेबसाइट का खुलासा, पुलिस की जनता से सतर्क रहने की अपील
देहरादून, 28 जुलाई।
उत्तराखंड में साइबर अपराधियों की नई चालें अब शिक्षा और खेल जगत तक पहुंच गई हैं। ताजा मामलों में साइबर ठगों ने एक ओर जहां स्कूल अभिभावकों को निशाना बनाते हुए फर्जी क्यूआर कोड के जरिये फीस वसूलने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर खिलाड़ियों को राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाने के नाम पर फर्जी वेबसाइट बनाकर धोखाधड़ी का जाल बिछाया।
स्कूल फीस के नाम पर अभिभावकों को भेजा गया फर्जी क्यूआर कोड
देहरादून के एक प्रतिष्ठित स्कूल के अभिभावकों को व्हाट्सएप पर ₹4990 की डेवलपमेंट फीस जमा करने का संदेश मिला, जिसमें एक क्यूआर कोड भी संलग्न था। साथ ही, विलंब शुल्क और अंतिम तिथि का भी उल्लेख था ताकि संदेश विश्वसनीय लगे।
संदेश मिलने पर कुछ सतर्क अभिभावकों ने जब स्कूल प्रशासन से संपर्क किया, तो यह स्पष्ट हुआ कि स्कूल ने ऐसा कोई संदेश नहीं भेजा है। समय रहते सतर्कता बरती गई, जिससे बड़ा फर्जीवाड़ा टल गया। स्कूल प्रशासन ने तुरंत सभी अभिभावकों को साइबर ठगी के प्रति सचेत किया।
खिलाड़ियों को ‘खेल पुरस्कार’ के नाम पर फंसाने की कोशिश
दूसरी तरफ, साइबर ठगों ने एक फर्जी वेबसाइट बनाकर स्वयं को ‘भारतीय और अंतरराष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025’ का आयोजक बताया।
विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए वेबसाइट पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि), नीरज चोपड़ा और पीटी ऊषा जैसी प्रतिष्ठित हस्तियों की तस्वीरें लगाई गईं और उन्हें चयन समिति का सदस्य बताया गया। वेबसाइट पर डोनेशन के लिए भी क्यूआर कोड दिया गया था।
एसटीएफ ने दर्ज की जीरो एफआईआर
एसएसपी एसटीएफ नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि ठगों ने खिलाड़ियों से पुरस्कार आवेदन के नाम पर पैसे ऐंठने की कोशिश की। मामला सामने आने के बाद साइबर थाना में जीरो एफआईआर दर्ज कर ली गई है। एसटीएफ मामले की गहराई से जांच कर रही है और ठगों की पहचान में जुटी है।
पुलिस की जनता से अपील: ऐसे रहें सतर्क
उत्तराखंड पुलिस और एसटीएफ ने नागरिकों से सतर्क रहने और निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने की अपील की है:
🔴 भुगतान केवल अधिकृत वेबसाइट या संस्थागत स्रोत से ही करें।
🔴 अज्ञात नंबरों से आए क्यूआर कोड या लिंक पर क्लिक न करें।
🔴 पुरस्कार या सरकारी योजनाओं से संबंधित जानकारी की पहले पुष्टि करें।
🔴 संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या निकटतम साइबर थाना को दें।