2 दिन की लावारिस नवजात बच्ची का रहस्य सुलझा: सूचना देने वाले ही निकले माता-पिता

पुलिस जांच में बड़ा खुलासा, SSP देहरादून ने खुद लिया था मामला संज्ञान में

 थाना क्लेमेंटाउन, देहरादून ,


देहरादून के क्लेमेंटाउन इलाके में बीते दिनों सड़क किनारे लावारिस हालत में मिली नवजात बच्ची के मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि जिस व्यक्ति ने बच्ची को देखे जाने की सूचना पुलिस व चाइल्ड हेल्पलाइन को दी थी, वही युवक और उसकी प्रेमिका इस बच्ची के माता-पिता हैं। पुलिस ने दोनों से पूछताछ कर पूरी सच्चाई उजागर की।

क्या है पूरा मामला:

2 जुलाई की रात क्लेमेंटाउन थाना क्षेत्र के पंत मार्ग के पीछे एक नवजात बच्ची सड़क किनारे पड़ी मिली। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। बाद में उसे शिशु निकेतन, केदारपुरम में दाखिल कराया गया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए चाइल्ड हेल्पलाइन को भी मौके पर बुला लिया।

SSP ने दिए थे सख्त निर्देश:

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) देहरादून ने घटना की गहन जांच के निर्देश दिए। थाना क्लेमेंटाउन की टीम ने घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसमें 3 जुलाई की रात एक स्कूटी पर युवक और युवती नवजात को वहां छोड़ते हुए नजर आए।

फोन कॉल बना सुराग:

जांच के दौरान जिस नंबर से चाइल्ड हेल्पलाइन को कॉल किया गया था, उसकी बारीकी से पड़ताल की गई। मोबाइल नंबर उसी युवक का निकला जो बच्ची को छोड़ने की फुटेज में दिख रहा था। जब उससे कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने स्वीकार किया कि बच्ची उसी की और उसकी प्रेमिका की है।

युवक ने बताया कि उसकी प्रेमिका देहरादून के एक निजी कॉलेज में पढ़ती है और दोनों पिछले 2-3 वर्षों से प्रेम संबंध में हैं। 2 जुलाई को युवती ने बच्ची को जन्म दिया। मगर पारिवारिक दबाव और सामाजिक भय के कारण दोनों ने नवजात को सड़क पर छोड़ने का निर्णय लिया, और फिर खुद ही सूचना देकर “मसीहा” बनने का प्रयास किया।

पुलिस की कार्रवाई:

  • दोनों युवाओं के परिजनों को थाने बुलाया गया है।

  • काउंसलिंग कराई जा रही है।

  • मामले में अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस की अपील:

देहरादून पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई पारिवारिक या सामाजिक संकट हो तो कानून की मदद लें। ऐसे मामलों में नवजात को छोड़ना अपराध है और इससे न सिर्फ बच्चे की जान खतरे में पड़ती है, बल्कि यह सामाजिक जिम्मेदारी से भागना भी है। राज्य में महिला और बाल विकास विभाग की कई योजनाएं हैं, जिनके तहत सहायता ली जा सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *