देहरादून ,
बुजुर्ग माता-पिता से विश्वासघात कर बेटे ने उनकी ज़िंदगी की कमाई हड़प ली – लेकिन जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल के न्यायिक हस्तक्षेप से इंसाफ की जीत हुई। 3080 वर्ग फीट की बहुमूल्य संपत्ति को जबरन हड़पने वाले बेटे की गिफ्ट डीड को डीएम ने एक झटके में खारिज करते हुए संपत्ति दोबारा बुजुर्ग दंपत्ति के नाम कर दी।
🏠 क्या था मामला:
देहरादून निवासी सरदार परमजीत सिंह और उनकी पत्नी अमरजीत कौर ने अपने बेटे के नाम गिफ्ट डीड के जरिए बंगला और बिजनेस सौंपा था, इस आशा में कि जीवन के अंतिम पड़ाव में बेटा उनका सहारा बनेगा। लेकिन गिफ्ट डीड हाथ लगते ही बेटे ने माता-पिता को न सिर्फ संपत्ति से बेदखल कर दिया, बल्कि उन्हें पोते-पोतियों से मिलने तक से वंचित कर दिया।
⚖️ तहसील, थाना और न्यायालयों से हारे, लेकिन डीएम कोर्ट में मिली राहत:
कई महीनों तक कानूनी दरवाज़े खटखटाने के बाद थकहार कर दंपत्ति ने डीएम न्यायालय का रुख किया। और यहीं से बदल गई कहानी।
डीएम सविन बंसल ने वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 की धारा 23 का प्रयोग करते हुए:
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बेटे के पक्ष में हुई गिफ्ट डीड को शून्य घोषित कर दिया
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पूरी 3080 वर्ग फीट की संपत्ति बुजुर्ग दंपत्ति के नाम वापस दर्ज करने का आदेश दिया
❗ गिफ्ट डीड की शर्तों का उल्लंघन बना फैसला पलटने का आधार:
फैसले में उल्लेख किया गया कि बेटे द्वारा गिफ्ट डीड की शर्तों का खुला उल्लंघन किया गया, जो कानूनन अस्वीकार्य है। आदेश में कहा गया कि माता-पिता की सेवा और सम्मान की जिम्मेदारी निभाने में विफल रहने पर ऐसी डीड रद्द की जा सकती है।
💔 फैसले के वक्त छलक पड़े आंसू:
जैसे ही आदेश सुनाया गया, वृद्ध दंपत्ति की आंखें भर आईं। वे बोले, “आज सचमुच लगा कि सरकार हमारे साथ खड़ी है, इंसाफ अभी भी ज़िंदा है।”
🔍 “गिफ्ट डीड कोई अंतिम अधिकार नहीं, अगर संतान बुजुर्गों से नफ़रमानी करे तो कानून ऐसे बेटे को संरक्षण नहीं देता” –
– डीएम सविन बंसल का दो टूक संदेश
📍 उत्तराखंड आवाज़ विशेष
यह मामला एक मिसाल है – हर उस बुजुर्ग के लिए जो अपनों के छल से टूट चुका है। प्रशासन जागरूक हो, तो कानून भी न्याय दिलाता है।
