देहरादून ,
देहरादून कलेक्ट्रेट के ऋषिपर्णा सभागार में जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में मंगलवार को आमजन की समस्याएं खुलकर सामने आईं। भूमि विवाद, अतिक्रमण, अवैध कब्जे, समाज कल्याण, जल संस्थान और नगर निगम से जुड़ी 150 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से कई का समाधान मौके पर ही किया गया।
🔹 मुख्य कार्यवाहियां और फैसले:
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दिव्यांग विवाह अनुदान:
फरियादी इजाजउद्दीन की बेटी की शादी के लिए ₹25,000 की तत्काल सहायता स्वीकृत की गई। समाज कल्याण अधिकारी को निर्देश दिए गए कि सहायता शीघ्र प्रदान की जाए। -
रोजगार और शिक्षा का अधिकार:
रीठामंडी की अतीयी मन्नो को रोजगार दिलाया गया, और उनकी बेटी को नंदा-सुनंदा योजना से पुनः जोड़ा गया। -
बैंक की लापरवाही पर सख्ती:
यूनियन बैंक द्वारा सत्यनारायण के लोक अदालत से निस्तारित वाद को न मानने पर बैंक मैनेजर को तलब किया गया और विधिक सेवा प्राधिकरण को पत्र भेजा गया। -
निःशुल्क कानूनी सहायता:
संतोष गुप्ता, महेश उनियाल और शाकुम्बरी देवली को मुफ्त कानूनी सलाह व अधिवक्ता मुहैया कराने के निर्देश। -
वरिष्ठ नागरिकों को राहत:
75 वर्षीय महिला के साथ 27 लाख की धोखाधड़ी के मामले में डीएम ने वरिष्ठ नागरिक सेल में केस दर्ज कर पुलिस को विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए। -
भूमाफिया पर कार्रवाई:
ब्रिगेडियर सुशील कुमार नेगी की भूमि पर अतिक्रमण के मामले में SDM विकासनगर को 7 दिन में Action Taken Report (ATR) प्रस्तुत करने के निर्देश। -
अतिक्रमण और पेड़ कटाई पर सख्ती:
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खलंगा नालापानी की वन भूमि पर अतिक्रमण मामले में ग्रामीण सिलिंग अधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई।
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किद्दूवाला में शॉल के पेड़ कटाई व खालों पर अतिक्रमण पर वन अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश।
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अन्य महत्त्वपूर्ण निर्देश:
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NH-72 के भूमि अधिग्रहण के बावजूद मुआवजा न मिलने पर विशेष भूमि अधिकारी को रिपोर्ट देने के निर्देश।
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अधोईवाला जैन प्लॉट की पेयजल व सीवर गड़बड़ी पर जल संस्थान के अधीक्षण अभियंता को तलब किया गया।
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🔹 कार्यक्रम में शामिल अधिकारी:
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, महाप्रबंधक उद्योग अंजली नेगी रावत सहित सभी संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
🔻 निष्कर्ष:
डीएम सविन बंसल की संवेदनशीलता और प्रशासनिक मुस्तैदी ने जनता दर्शन कार्यक्रम को भरोसे और न्याय का मंच बना दिया। एक ही छत के नीचे फरियादियों को न केवल सुना गया, बल्कि तत्काल राहत और समाधान भी प्रदान किए गए। उत्तराखंड में “जन सुनवाई” अब सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रभावी शासन का प्रमाण बनती जा रही है।
