देहरादून,
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए योग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि योग न केवल भारत की प्राचीन और गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है, बल्कि यह सम्पूर्ण मानवता के लिए जीवन को संतुलित और सकारात्मक बनाए रखने का माध्यम भी है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि योग अभ्यास से मानसिक शांति, आत्मिक चेतना और शारीरिक स्फूर्ति का समन्वय होता है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि आंतरिक जागरूकता और आत्मबोध की साधना है। उन्होंने कहा कि ऋषि पतंजलि द्वारा प्रदत्त योग पथ ने संपूर्ण विश्व को स्वस्थ और शांतिपूर्ण जीवन की दिशा दिखाई है।
“योग से दुनिया में बनी भारत की पहचान”
सीएम धामी ने कहा कि आज योग ने भारत को वैश्विक पटल पर एक विशिष्ट पहचान दी है। विश्वभर में लोग भारतीय योगशास्त्र से प्रेरणा लेकर जीवनशैली में परिवर्तन ला रहे हैं। योग ने न केवल तनाव घटाने में मदद की है, बल्कि यह असंभव लक्ष्यों की प्राप्ति में भी सहायक सिद्ध हो रहा है।
सनातन संस्कृति का मूल स्तंभ
मुख्यमंत्री ने योग को सनातन संस्कृति का मूल स्तंभ बताते हुए कहा कि हमारी संस्कृति की लोककल्याणकारी अवधारणा – “वसुधैव कुटुंबकम” – का आधार भी योग और मानवीय मूल्यों पर टिका है। उन्होंने कहा कि भारत ने वैश्विक षड्यंत्रों और चुनौतियों का सामना करते हुए भी मानवीय दृष्टिकोण से कभी विचलन नहीं किया।
गैरसैंण में होगा मुख्य आयोजन
धामी ने जानकारी दी कि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर राज्य का मुख्य कार्यक्रम गैरसैंण, ग्रीष्मकालीन राजधानी में आयोजित किया जाएगा, जहां वह स्वयं मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन योग को जन-जन तक पहुँचाने और जनजागरण का माध्यम बनेगा।
मुख्य बिंदु:
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योग केवल अभ्यास नहीं, आत्मबोध की प्रक्रिया है: सीएम धामी
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ऋषि-मुनियों की देन योग ने भारत को वैश्विक पहचान दिलाई
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“वसुधैव कुटुंबकम” की अवधारणा में योग का अहम स्थान
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21 जून को गैरसैंण में राज्य स्तरीय योग कार्यक्रम का आयोजन
“योग भारत की आत्मा है, और आज यह विश्व के स्वास्थ्य और शांति का मार्गदर्शक बन चुका है।” — मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी