“मोदी ने स्थापित की परफॉर्मेंस की राजनीति की संस्कृति” — मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

 देहरादून ,

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 11 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देश की राजनीति में “परफॉर्मेंस ऑफ पॉलिटिक्स” की एक नई संस्कृति की स्थापना हुई है। अब शासन का अर्थ सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि सुधार (Reform), प्रदर्शन (Perform) और रूपांतरण (Transform) हो गया है।


🔍 मुख्यमंत्री धामी के संबोधन की मुख्य बातें:

✅ मोदी युग की विशेषताएं:

  • पीएम मोदी के कार्यकाल ने देश को भ्रष्टाचार से सुशासन तक पहुंचाया।

  • राजनीति अब वादों की नहीं, प्रदर्शन की संस्कृति बन चुकी है।

  • देश की नीतियों में गरीब केन्द्र बिन्दु बन गया है।

✅ विकसित भारत की दिशा में उत्तराखंड का योगदान:

  • उत्तराखंड को विकसित भारत का हिस्सा बनाने के लिए हर गांव, तहसील और शहर का समान विकास हो रहा है।

  • धामी बोले: “हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर और सशक्त बने।”

✅ 11 वर्षों की केंद्र सरकार की उपलब्धियाँ:

  • 15 करोड़ लोगों को नल से जल

  • 81 करोड़ को मुफ्त राशन

  • 12 करोड़ से अधिक शौचालय निर्माण

  • 52.5 लाख छोटे उद्यमियों को मुद्रा लोन

  • 17.1 करोड़ लोगों को नौकरियाँ

  • आतंकवाद पर सर्जिकल स्ट्राइक (2016, 2019, 2025)

  • महिला आरक्षण, तीन तलाक निषेध, जीएसटी, नोटबंदी, डिजिटल भारत अभियान

  • ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे सैन्य अभियानों से वैश्विक छवि सशक्त

✅ आस्था और संस्कृति का पुनरुद्धार:

  • पिछले 11 सालों में भारत ने धार्मिक जागरण और संस्कृति की पुनर्प्रतिष्ठा का कार्य किया है।

  • “विरासत भी, विकास भी” मंत्र के साथ आधुनिकता और परंपरा का संतुलन साधा गया है।


🗣️ कांग्रेस पर निशाना:

धामी ने कहा कि कांग्रेस के शासन में केवल “गरीबी हटाओ” के नारे थे, लेकिन मोदी सरकार ने 27 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला। अब गरीब सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि नीति निर्माण के केंद्र में हैं।


📢 प्रदर्शनी का उद्घाटन:

मुख्यमंत्री धामी और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने 11 वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
भट्ट ने कहा कि “पीएम मोदी के नेतृत्व में 140 करोड़ देशवासियों का यह प्रयास निरंतर जारी रहेगा।”

“मोदी है तो मुमकिन है” अब केवल एक नारा नहीं, देश की नीतिगत और कार्यसंस्कृति का वास्तविक प्रतिबिंब बन चुका है।

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