देहरादून ,
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दिल्ली में 1 नवंबर से बीएस-6, CNG या इलेक्ट्रिक बसों को ही मिलेगी एंट्री।
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उत्तराखंड रोडवेज के पास केवल 130 BS-6 और 175 CNG बसें।
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500 इलेक्ट्रिक बसों की मांग कर्मचारी यूनियन ने की।
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दिल्ली रूट पर सेवा बंद होने से रोडवेज की आमदनी को लगेगा बड़ा झटका।
🚌 क्यों बढ़ी इलेक्ट्रिक बसों की मांग?
उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने निगम प्रबंधन को भेजे पत्र में कहा है कि
“अगर 500 इलेक्ट्रिक बसें शामिल की जाती हैं, तो हर दिन करीब ₹50 लाख की बचत संभव है।”
प्रति बस अनुमानित बचत:
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₹10,000/दिन
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₹2.5 लाख/महीना
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₹30 लाख/साल
🔧 मौजूदा स्थिति:
| बस का प्रकार | संख्या |
|---|---|
| बीएस-6 डीजल | 130 |
| CNG बसें | 175 (12 वोल्वो सहित) |
| इलेक्ट्रिक | 0 |
📉 रोडवेज की हालत खराब:
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वेतन और देयक लंबित
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प्रबंधन पर “सकारात्मक पहल न करने” का आरोप
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प्रशासनिक और तकनीकी कुप्रबंधन की शिकायतें
📋 यूनियन के सुझाव:
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500 इलेक्ट्रिक बसें तुरंत खरीदी जाएं।
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सभी नई बसें वातानुकूलित हों, जिससे यात्रियों को बेहतर सेवा मिले और प्रतिस्पर्धा में रोडवेज मजबूत बने।
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डीजल बसों की निर्भरता घटाकर लागत कम की जाए।
⚠️ अगर समाधान नहीं निकला तो?
दिल्ली सरकार के नए नियमों के चलते उत्तराखंड से दिल्ली के बीच बस सेवा ठप पड़ सकती है, जिससे:
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रोडवेज को भारी आर्थिक नुकसान होगा।
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यात्रियों को निजी बस ऑपरेटरों पर निर्भर रहना पड़ेगा।
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सार्वजनिक परिवहन का भरोसा डगमगाएगा।
उत्तराखंड रोडवेज के लिए यह “करो या मरो” की स्थिति है। यदि समय रहते सरकार और निगम प्रबंधन ने इलेक्ट्रिक बसों की खरीद पर कदम नहीं उठाया, तो नवंबर से दिल्ली रूट पर सफर करना मुश्किल हो जाएगा।