मसूरी ,
पर्यटन नगरी मसूरी में बृहस्पतिवार को ट्रैफिक जाम एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ। दिल्ली से आए 62 वर्षीय कमल किशोर टंडन की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका। करीब 45 मिनट तक ट्रैफिक में फंसे रहने के बाद उनकी मौत हो गई। यह हादसा न केवल परिवार के लिए दर्दनाक है, बल्कि उत्तराखंड की ट्रैफिक व्यवस्था पर भी गहरा सवाल खड़ा करता है।
🚨 क्या हुआ था?
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कमल किशोर टंडन, दिल्ली निवासी, छह लोगों के परिवारिक समूह के साथ मसूरी घूमने आए थे।
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वो लाइब्रेरी चौक क्षेत्र के पास ठहरे हुए थे।
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बृहस्पतिवार को बारिश और ठंड के बीच उनकी तबीयत बिगड़ी।
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हार्टअटैक की आशंका जताई गई।
🚑 एम्बुलेंस नहीं, टैक्सी से अस्पताल ले जाने का निर्णय
मृतक के भतीजे अर्जुन कपूर के अनुसार:
“एम्बुलेंस देहरादून से बुलाने में वक्त लग रहा था, इसलिए हमने टैक्सी से उन्हें अस्पताल ले जाना चाहा, लेकिन जाम ने रास्ता ही रोक दिया।”
– अर्जुन कपूर
🚧 पौन घंटे तक फंसी रही टैक्सी, समय पर नहीं पहुंच सके अस्पताल
➡️ भारी ट्रैफिक और लगातार बारिश के कारण लाइब्रेरी चौक से अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल हो गया।
➡️ करीब 45 मिनट बाद जब वे अस्पताल पहुंचे, तब तक कमल किशोर टंडन दम तोड़ चुके थे।
🧭 बड़ी समस्या बनती पर्यटन स्थलों की ट्रैफिक व्यवस्था
उत्तराखंड में पर्यटन सीजन के दौरान:
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मसूरी, नैनीताल, हरिद्वार, ऋषिकेश जैसे शहरों में रोजाना लंबे ट्रैफिक जाम लग रहे हैं।
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न केवल स्थानीय लोग बल्कि हजारों सैलानी इससे प्रभावित हो रहे हैं।
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एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाएं भी कई बार फंसी रहती हैं।
⚠️ प्रशासनिक सवाल
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एम्बुलेंस व्यवस्था क्यों नहीं है स्थानीय स्तर पर सक्रिय?
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जाम नियंत्रण के लिए यातायात पुलिस की तैयारी क्या है?
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पर्यटन सीजन में इमरजेंसी ट्रैफिक कॉरिडोर क्यों नहीं बनते?
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क्या इस मौत की जिम्मेदारी प्रशासन लेगा?
🗣️ जनाक्रोश और प्रतिक्रिया की संभावना
यह घटना सिर्फ एक दुखद मौत नहीं, बल्कि एक सिस्टम फेलियर का उदाहरण है। पर्यटन को बढ़ावा देने वाली सरकारें अगर बुनियादी व्यवस्थाएं – जैसे कि ट्रैफिक मैनेजमेंट, इमरजेंसी मेडिकल एक्सेस – को लेकर गंभीर नहीं हैं, तो पर्यटन आशीर्वाद नहीं, अभिशाप बन सकता है।
🔍 समाधान की ज़रूरत
✔️ मसूरी जैसे संवेदनशील हिल स्टेशन पर
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स्थानीय एम्बुलेंस स्टेशनों की तैनाती
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अत्यधिक भीड़भाड़ में ‘ग्रीन कॉरिडोर’ नीति
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डिजिटल ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम
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ऑल्टरनेट रूट्स और पार्किंग की सुव्यवस्था
कमल किशोर टंडन की इस दुखद मौत ने उत्तराखंड के पर्यटन तंत्र की कमज़ोरियों को उजागर कर दिया है। यह हादसा न दोहराया जाए – इसके लिए तत्काल ठोस कदमों की आवश्यकता है।