चमोली,
सिख धर्म के पवित्रतम तीर्थ स्थलों में से एक, श्री हेमकुंड साहिब में इन दिनों आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई और बर्फीले मौसम के बावजूद, तीर्थयात्रियों का उत्साह ठंड से भी अधिक तीव्र दिखाई दे रहा है। रुक-रुक कर हो रही बर्फबारी और तीव्र हवाओं के बीच भी श्रद्धालु पवित्र सरोवर में डुबकी लगा रहे हैं, जो उनकी अद्वितीय श्रद्धा और संकल्प को दर्शाता है।
पिछले आठ दिनों में 30,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारे के दर्शन कर इस यात्रा को ऐतिहासिक बना दिया है। यह संख्या पिछले वर्षों के आंकड़ों को पीछे छोड़ते हुए तीर्थयात्रा की बढ़ती लोकप्रियता और श्री हेमकुंड साहिब के प्रति लोगों की गहरी निष्ठा को रेखांकित करती है। हर साल मई से अक्टूबर तक चलने वाली यह यात्रा, न केवल कठिनाईयों से भरी होती है, बल्कि आत्मिक ऊर्जा से भी भरपूर होती है।
प्रशासन और प्रबंधन की सक्रिय भूमिका
श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने हाल ही में उत्तराखंड के मुख्य सचिव श्री आनंद वर्धन से मुलाकात कर यात्रा की व्यवस्थाओं और आगे की योजनाओं पर चर्चा की। उन्होंने गोविंदघाट में एक स्थायी पुल के निर्माण को प्राथमिकता देने की मांग की, जिसकी घोषणा पहले ही मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी कर चुके हैं। यह पुल वर्षा और बर्फबारी के समय सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करेगा।
साथ ही, घांघरिया में दो नए विश्राम हॉलों के निर्माण को मंजूरी मिलने पर उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और कहा कि इससे तीर्थयात्रियों को बेहतर ठहराव और सुविधाएं मिलेंगी।
सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम
राज्य और जिला प्रशासन की ओर से इस बार यात्रा मार्ग पर सुरक्षा और सुविधाओं के विशेष इंतजाम किए गए हैं। एसडीआरएफ, एटीएस और आईटीबीपी की टीमें प्रमुख बिंदुओं पर तैनात हैं, जो किसी भी आपात स्थिति में तत्पर रहने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा, रहने, चिकित्सा और खानपान की व्यवस्थाएं भी सुदृढ़ की गई हैं।
आध्यात्मिकता के साथ पर्यावरण चेतना
श्री बिंद्रा ने सभी श्रद्धालुओं से प्लास्टिक मुक्त यात्रा अपनाने की अपील की और पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, “श्रद्धालुओं का सहयोग और प्रशासन की सतर्कता, दोनों मिलकर इस पवित्र यात्रा को सफल बनाते हैं।”
एक अद्वितीय अनुभव
श्री हेमकुंड साहिब, गुरु गोबिंद सिंह जी की तपोस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। यह स्थान न केवल सिख समुदाय के लिए, बल्कि सभी धर्मों के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम प्रस्तुत करता है। पास ही स्थित फूलों की घाटी और लक्ष्मण मंदिर भी यात्रा को और अधिक अविस्मरणीय बना देते हैं।
श्री हेमकुंड साहिब यात्रा एक बार फिर आस्था, समर्पण और संगठन की मिसाल बनकर सामने आई है। भीषण मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह और प्रशासन की मुस्तैदी, दोनों मिलकर इस यात्रा को न केवल सुरक्षित बल्कि प्रेरणादायक भी बना रहे हैं।