देहरादून,
अस्पताल प्रशासन द्वारा तीन तंदुरुस्त और हरे-भरे पेड़ों की कटाई ने क्षेत्र में पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों को आक्रोशित कर दिया है। श्री महाकाल सेवा समिति समेत कई पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस गैर-जिम्मेदाराना हरकत पर गहरी आपत्ति जताई है और प्रशासन से कड़ी कार्यवाही की मांग की है।
परिसर में खड़े थे छांवदार पेड़, प्रशासन ने बताया ‘खराब’
मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल परिसर में मौजूद तीन पूर्ण रूप से स्वस्थ, घने और छायादार पेड़ों को प्रशासन ने खराब हालत में बताकर कटवा दिया। जबकि प्रत्यक्षदर्शियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का दावा है कि ये पेड़ बिल्कुल हरे-भरे थे और परिसर की हरियाली में चार चांद लगा रहे थे।
सूखा पेड़ नहीं दिखा प्रशासन को
चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल के बाहर एक और पेड़, जो कि पूरी तरह सूख चुका है और गिरने की स्थिति में है, अभी भी जस का तस खड़ा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की नज़र इस असल खतरे पर नहीं पड़ी, जबकि हरे-भरे पेड़ों को केवल ‘सुविधा’ के लिए निशाना बनाया गया।
श्री महाकाल सेवा समिति और संगठनों ने दी चेतावनी
श्री महाकाल सेवा समिति, अन्य सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों ने न केवल इस कार्रवाई पर विरोध जताया, बल्कि स्पष्ट रूप से प्रशासन को चेताया कि यदि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हुई तो जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।
मंदिर प्रांगण का पेड़ भी खतरे में
सूत्रों से यह जानकारी भी सामने आई है कि उसी परिसर में स्थित मंदिर के पास एक और पेड़ को भी काटने की योजना बनाई जा रही है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने अपील की है कि इस योजना पर तत्काल रोक लगाई जाए और प्रत्येक पेड़ की वास्तविक स्थिति की पारदर्शी जांच की जाए।
मांगें और सुझाव:
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पेड़ कटाई से पहले arborist या वन विभाग की रिपोर्ट अनिवार्य की जाए।
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प्रत्येक पेड़ पर QR कोड सहित स्वास्थ्य रिपोर्ट चस्पा की जाए।
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कटाई के एवज में न्यूनतम 10 गुना वृक्षारोपण की गारंटी सुनिश्चित हो।
अब देखना यह है कि प्रशासन पर्यावरण की इस खुली अनदेखी पर क्या रुख अपनाता है, या फिर पेड़ कटाई का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।
