कोटद्वार/देहरादून,
उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (एडीजे कोर्ट) ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने तीनों आरोपियों—पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता—को हत्या, साक्ष्य मिटाने और महिला की गरिमा भंग करने जैसे गंभीर अपराधों का दोषी मानते हुए आजीवन कठोर कारावास और जुर्माना की सजा सुनाई है।
अपराध और जांच का संक्षिप्त विवरण
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मामला: अंकिता भंडारी, रिसेप्शनिस्ट, की 18 सितंबर 2022 को हत्या कर शव को चीला शक्ति नहर में फेंका गया था।
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स्थान: वनंत्रा रिजॉर्ट, यमकेश्वर (पौड़ी गढ़वाल)
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पहली सुनवाई: 30 जनवरी 2023
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जांच एजेंसी: विशेष जांच दल (SIT)
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अभियोग पत्र: अभियोजन ने अदालत में 500 पृष्ठों का विस्तृत आरोपपत्र दाखिल किया था।
तीनों दोषियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 201 (सबूत मिटाना), और 354 (महिला से दुर्व्यवहार) के अंतर्गत अपराध सिद्ध हुए।
कांग्रेस ने की फांसी की मांग, वीवीआईपी भूमिका पर उठाए सवाल
उत्तराखंड कांग्रेस ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे “न्याय की दिशा में एक सकारात्मक कदम” बताया है, लेकिन साथ ही सरकार से अभियोजन पक्ष को उच्च न्यायालय में अपील कर दोषियों को फांसी की सजा दिलाने की मांग की है।
कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने कहा,
“राज्य की जनता इस जघन्य अपराध में फांसी से कम सज़ा से संतुष्ट नहीं है। दोषियों का सत्ता पक्ष से सीधा संबंध रहा है, और उनके परिवार भाजपा व आरएसएस से जुड़े हैं। इससे पूरे विवेचना और अभियोजन पर संदेह की स्थिति बनी रही।”
धस्माना ने यह भी आरोप लगाया कि अंकिता ने एक वीवीआईपी की भूमिका का ज़िक्र अपने मित्र से चैट में किया था, परंतु आज तक उस दिशा में जांच आगे नहीं बढ़ पाई, जिसे विवेचना की गंभीर कमी करार दिया गया।
जनभावना और अगली कानूनी कार्रवाई
फैसले के बाद अंकिता के परिजनों और स्थानीय जनसमुदाय ने न्यायालय के आदेश को “आंशिक न्याय” करार देते हुए दोषियों को फांसी देने की मांग दोहराई। उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार अभियोजन को उच्च न्यायालय में अपील करने का निर्देश देगी।
यह मामला केवल न्यायिक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का विषय भी बन चुका है। अंकिता के लिए न्याय की यह लड़ाई अब उच्च न्यायालय में प्रवेश कर सकती है।