देहरादून,
उत्तराखंड सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी “जीरो टॉलरेंस नीति” के तहत कार्रवाई तेज कर दी है। सतर्कता विभाग ने सोमवार को ऊधमसिंह नगर जनपद के सितारगंज में मुख्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को ₹2000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपी कर्मचारी कमलेश, नंदा गोरा योजना के तहत मिलने वाली सहायता के प्रमाणपत्र के लिए छात्रा से सुविधा शुल्क मांग रही थी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान बीते तीन वर्षों से सतत जारी है। आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक 80 से अधिक लोगों को रंगे हाथ पकड़ा जा चुका है, जिनमें से अधिकांश को जेल भेजा गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर विजिलेंस विभाग को विशेष सक्रियता प्रदान की गई है और शिकायतों के लिए टोल फ्री नंबर 1064 और विशेष ऐप भी प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है।
कुछ चर्चित मामले एक नजर में:
🔹 लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) के एई – नैनीताल में ₹10,000 रिश्वत लेते पकड़ा गया।
🔹 बिजली विभाग का जेई – देहरादून में बिजली कनेक्शन के एवज में ₹15,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार।
🔹 एलआईयू कर्मी – रामनगर में उप निरीक्षक व मुख्य आरक्षी रिश्वत लेते पकड़े गए।
🔹 आरटीओ कार्यालय, कोटद्वार – वरिष्ठ सहायक ₹3,000 की रिश्वत लेते गिरफ्तार।
🔹 रोडवेज एजीएम – काशीपुर में ₹90,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए।
🔹 खंड शिक्षा अधिकारी, खानपुर – शिक्षक को क्लीन चिट देने के लिए ₹10,000 घूस मांगने का आरोप।
🔹 GST असिस्टेंट कमिश्नर – देहरादून में ₹75,000 की रिश्वत लेते पकड़ा गया।
🔹 जिला आबकारी अधिकारी, रुद्रपुर – शराब कारोबारी से 10% रिश्वत की मांग पर गिरफ्तारी।
🔹 आबकारी इंस्पेक्टर, कर्णप्रयाग – ₹30,000 रिश्वत के साथ पकड़े गए।
🔹 कानूनगो, पौड़ी – भूमि सीमांकन के लिए ₹15,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार।
🔹 सीएम हेल्पलाइन कर्मी – शिकायत निपटारे के नाम पर पैसे मांगने पर कार्रवाई।
मुख्यमंत्री का सख्त संदेश:
मुख्यमंत्री धामी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार चाहे किसी भी स्तर पर हो, किसी को बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वह प्रभावशाली अधिकारी हो या कोई राजनैतिक शख्सियत, सरकार सभी पर समान रूप से कार्रवाई कर रही है। उनकी “जीरो टॉलरेंस नीति” के परिणामस्वरूप उत्तराखंड राज्य गठन के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई हुई है।