ईको सर्विस लागत, वन संरक्षण, राजस्व घाटा, आपदाएं और बुनियादी ढांचे पर विशेष सहायता की मांग
देहरादून ,
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सचिवालय में 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगड़िया और आयोग के सदस्यों के साथ महत्वपूर्ण बैठक में उत्तराखंड की वित्तीय स्थिति, संरचनात्मक चुनौतियां और विकासात्मक प्राथमिकताओं को मजबूती से प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री ने “इनवॉयरमेंटल फेडरलिज्म” की भावना का हवाला देते हुए वन आच्छादन को लेकर कर-हस्तांतरण में भार 20% तक बढ़ाने और विशेष अनुदान की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड की ईको सर्विस लागत का केंद्र से उचित क्षतिपूर्ति मिलनी चाहिए।
🔹 मुख्य बिंदु:
🌲 वन क्षेत्र और ईको सर्विस लागत
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राज्य का 70% से अधिक भूभाग वनों से आच्छादित है।
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इससे जहां वन संरक्षण पर अतिरिक्त व्यय होता है, वहीं विकास कार्यों पर भी प्रतिबंध लगता है।
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मुख्यमंत्री ने वन क्षेत्र के बेहतर प्रबंधन के लिए विशेष वित्तीय सहायता की मांग की।
🏔️ भौगोलिक चुनौतियां और विकास अंतर
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2010 के बाद औद्योगिक प्रोत्साहन समाप्त होने से राज्य “लोकेशनल डिसएडवांटेज” झेल रहा है।
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स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में निजी निवेश की सीमित भागीदारी के चलते सरकार को विशेष बजट का प्रावधान करना पड़ रहा है।
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राज्य ने स्मार्ट क्लास, क्लस्टर स्कूल, टेलीमेडिसिन जैसे उपायों से सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के प्रयास किए हैं।
⚡ जल विद्युत और गंगा के नियमों से प्रभाव
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गंगा के राष्ट्रीय नदी घोषित होने के बाद जल विद्युत परियोजनाओं पर अंकुश लगा है।
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इससे न केवल राजस्व, बल्कि रोजगार पर भी असर पड़ा है।
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मुख्यमंत्री ने प्रभावित परियोजनाओं की क्षतिपूर्ति की मांग की।
🌊 आपदा प्रबंधन और जल संरक्षण
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राज्य प्राकृतिक आपदाओं के लिए संवेदनशील है।
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पुनर्वास और राहत कार्यों हेतु निरंतर आर्थिक सहयोग आवश्यक है।
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मुख्यमंत्री ने ‘भागीरथ एप’ और सारा योजना के जरिए जल स्रोत पुनर्जीवन के प्रयासों की जानकारी दी और इनके लिए विशेष अनुदान की अपील की।
💵 वित्तीय अनुशासन और राजकोषीय सुझाव
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राजकोषीय अनुशासन को ‘डिवोल्यूशन फॉर्मूला’ में शामिल करने का सुझाव।
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‘रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट’ की जगह ‘रेवेन्यू नीड ग्रांट’ लागू करने की वकालत।
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राज्य में क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात कम होने से पूंजीगत व्यय पर असर।
🗨️ वित्त आयोग की प्रतिक्रिया
डॉ. अरविंद पनगड़िया ने उत्तराखंड की विकास गति की सराहना करते हुए कहा कि राज्य ने प्रति व्यक्ति आय और बेरोजगारी में सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।
उन्होंने पर्वतीय राज्यों की चुनौतियों पर व्यापक विचार-विमर्श का भरोसा दिलाया और कहा कि आयोग 31 अक्टूबर 2025 तक केंद्र को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।
इस अहम बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, वित्त सचिव दिलीप जावलकर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।मुख्यमंत्री धामी की यह पहल राज्य की वित्तीय जरूरतों को केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से रखने की दिशा में एक ठोस कदम है। अब देखना होगा कि 16वां वित्त आयोग इन मांगों को कितनी प्राथमिकता देता है।