पांवटा साहिब ,
दशमेश पिता साहिब श्री गुरू गोबिंद सिंह जी श्री आनंदपुर से नाहन के राजा मेदनी प्रकाश के अनुरोध पर नाहन पधारे और पांवटा साहिब की सरजमीन को रहने लायक समझकर पवित्र यमुना के तट पर पहुंच कर अपने घोड़े से उतर कर पांव रखने से संगत ने पांव टेकाया नाम रखा और फिट पांव टेकया से पांवटा साहिब नाम रख दिया। पांवटा साहिब की सरजमीन में श्री गुरू गोबिंद सिंह जी ने बहुत कौतक रचाए जिन की याद में बहुत से पवित्र स्थानों में गुरुद्वारा श्री पांवटा साहिब जिस स्थान पर गुरु साहिब 4 साल भी अधिक समय रहे। गुरुद्वारा श्री पांवटा साहिब के इलावा,गुरद्वारा शेर घाह, गुरुद्वारा भंगानी साहिब, गुरदवारा तीर गा ड़ी, गुरदेसरा छाओनी साहिब अकाल गढ़, गुरुद्वारा दस्ता स्थान, कवि दरबार साहिब मौजूद हैं।
इन पवित्र स्थानों की देख भाल और प्रचार प्रसार के लिए कोई खास परबंध नहीं है। गुरुद्वारा भंगानी साहिब,तीर गढ़ी, शेर गाह और छावनी साहिब वास्ते तो कोई प्रचार प्रसार करने वाला नहीं है।
प्रबंधक कमिटी गुरुद्वारा श्री पांवटा साहिब को इन सभी गुरु घरों की देख भाल करने की जिम्मीदरी सौंप देनी जरूरी है ताकि इन स्थानों के प्रचार प्रसार में कोई कमी न हो।
(हरबख्श सिंह)