विभिन्न संगठनों ने बढ़ते नशे के खिलाफ राजधानी में निकाला जनजागरूकता मार्च

देहरादून ,

उत्तराखंड महिला मंच एवं नशा विरोधी जन अभियान के तत्वावधान में विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करें, नशे ड्रग्स के खिलाफ एकजुट हों सहित अनेकों नारों लिखी तख्तियों के साथ बढ़ते नशे के खिलाफ राजधानी में जन जागरूकता मार्च निकालकर सचिवालय कूच करने लगे तो पुलिस ने सभी को वहीं गांधी पार्क पर रोक लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों व पुलिस के बीच तीखी नोंकझोंक एवं धक्का मुक्की हुई तथा वहीं पर कुछ देर धरने पर बैठ गये। यहां विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता गांधी पार्क में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष इकटठा हुए और वहां से जोरदार नारेबाजी एवं जनगीतों के साथ नशे पर रोक लगाये जाने सहित अनेक मांगों को लेकर राजधानी में जन जागरूकता मार्च निकालकर सचिवालय कूच करने लगे तो पुलिस ने सभी को वहीं पर रोक लिया और इस दौरान प्रदर्शनकारियों व पुलिस के बीच तीखी नोंकझोंक एवं धक्का मुक्की हुई तथा बाद में सभी वहीं पर कुछ देर धरने पर बैठ गये। इस दौरान वहीं गांधी पार्क में प्रशासनिक अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। इस अवसर पर उत्तराखंड महिला मंच की प्रदेश संयोजक व टीम नशा विरोधी जन अभियान की सदस्य कमला पंत ने कहा है कि इस अभियान की शुरूआत की गई है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में बढ़ते नशे का प्रकोप विशेषकर यहां देहरादून में और आसपास के क्षेत्रों में तो हद से ज्यादा ही बढ़ते ही जा रहा है और यह अब नौजवान हो रहे स्कूली बच्चों को भी बहुत तेजी से बर्बाद कर रहा है। उन्होंने कहा कि नशा विरोधी जन अभियान चलाया जा रहा है लेकिन सरकार इस ओर ठोस पहल नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि यहां से पूरे उत्तराखंड को भी अपनी गिरफ्त में लेता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले तो शराब का ही जोर था पर अब तो उससे कहीं ज्यादा तेजी से ड्रग्स का प्रचलन बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि नशे के सौदागरों के चलते, बच्चों का जीवन तो खतरे में पड़ता ही जा रहा है और परिवार के परिवार बर्बाद हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि नशे पर रोक लगाये जाने की जरूरत है और सरकार को इस दिशा में आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि इधर हाल में पुलिस विभाग ने भी नशे के खिलाफ अभियान चलाया पर उसका भी कुछ खास प्रभाव नहीं नजर आया है और उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी रेवेन्यू के चक्कर मे नशे के खिलाफ कोई खास संवेदनशील नजर नहीं आ रही है तो इसका मुख्य कारण आम लोगों की नशे के खिलाफ जागरुकता व एकजुटता का अभाव भी है।

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