देहरादून ,
उत्तराखंड में हालिया साइबर हमलों के विश्लेषण से एक चिंताजनक ट्रेंड सामने आया है। शुरुआती जांच और पिछले बड़े साइबर हमलों के अध्ययन से संकेत मिले हैं कि साइबर हमलावर सरकारी छुट्टियों और सप्ताहांत (वीकेंड) के दौरान सरकारी वेबसाइटों और डिजिटल सेवाओं को निशाना बना रहे हैं। इस दौरान वेबसाइटों पर ट्रैफिक अपेक्षाकृत कम रहता है और तकनीकी निगरानी व त्वरित प्रतिक्रिया भी सीमित होती है, जिसका फायदा उठाकर हमलावर अपने प्रयास तेज कर रहे हैं।
हाल ही में शनिवार को उत्तराखंड के लगभग दस सरकारी विभागों की वेबसाइटें मालवेयर हमले की चपेट में आ गई थीं। प्रभावित पोर्टलों में मुख्यमंत्री राहत कोष, लोक निर्माण विभाग (PWD), खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, पर्यटन, परिवहन समेत कई अन्य विभाग शामिल थे। सूचना प्रौद्योगिकी विकास अभिकरण (ITDA) की साइबर सुरक्षा टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रभावित वेबसाइटों को एहतियातन ऑफलाइन किया और सुरक्षित बैकअप के माध्यम से कुछ ही घंटों में सेवाएं बहाल कर दीं।
साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि हमलावर ऐसे समय का चयन करते हैं जब आईटी टीमों की उपलब्धता कम होती है और सुरक्षा मॉनिटरिंग अपेक्षाकृत धीमी रहती है। इससे मालवेयर या अन्य साइबर हमलों को अंजाम देना आसान हो सकता है। हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी तक इसे आधिकारिक निष्कर्ष के रूप में घोषित नहीं किया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।
गौरतलब है कि वर्ष 2024 में उत्तराखंड की करीब 90 सरकारी वेबसाइटों पर बड़े साइबर हमले के बाद राज्य सरकार ने डेटा बैकअप, नेटवर्क सुरक्षा और साइबर निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए थे। अधिकारियों का कहना है कि इन्हीं सुधारों के कारण हालिया हमले का प्रभाव सीमित रहा और अधिकांश सेवाएं शीघ्र बहाल की जा सकीं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि भविष्य में सरकारी अवकाश और सप्ताहांत के दौरान भी 24×7 सुरक्षा निगरानी, रियल-टाइम अलर्ट सिस्टम, नियमित सुरक्षा ऑडिट और बैकअप सत्यापन जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाए, ताकि इस नए साइबर हमले के पैटर्न का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।