अंगदान मृत्यु के बाद भी जीवन का उपहार, महादान के लिए आगे आएं लोग: विशेषज्ञ

देहरादून ,
अंगदान दिवस के अवसर पर सोमवार को श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग द्वारा अंगदान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को इस महादान के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में 100 से अधिक मरीजों, उनके परिजनों, किडनी प्रत्यारोपण से जुड़े दाताओं और लाभार्थियों ने भाग लेकर अंगदान का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) के राज्य समन्वयक डॉ. अतुल सिंह तथा श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल मलिक ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

मुख्य अतिथि डॉ. अतुल सिंह ने कहा कि अंगदान मानवता की सर्वोच्च सेवा है। एक व्यक्ति के अंगदान से कई गंभीर रूप से बीमार मरीजों को नया जीवन मिल सकता है। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद भी व्यक्ति अपने अंगों के माध्यम से अनेक परिवारों की खुशियां लौटा सकता है। समाज में फैली भ्रांतियों को दूर कर प्रत्येक नागरिक को अंगदान के लिए आगे आना चाहिए।

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट प्रो. डॉ. आलोक कुमार ने कहा कि देश में हजारों मरीज किडनी, लिवर, हृदय और अन्य अंगों के प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन अंगदाताओं की कमी के कारण अनेक मरीज समय पर उपचार नहीं प्राप्त कर पाते। उन्होंने कहा कि अंगदान किसी जीवन का अंत नहीं, बल्कि कई लोगों के जीवन की नई शुरुआत है। यदि अधिक से अधिक लोग अंगदान का संकल्प लें, तो हजारों परिवारों को नई उम्मीद मिल सकती है।

उन्होंने बताया कि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल अंगदान के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार अभियान चला रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस पुनीत कार्य से जुड़ सकें।

कार्यक्रम के दौरान किडनी दाताओं, प्रत्यारोपण लाभार्थियों, किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट की इंचार्ज सिस्टर दीक्षा तथा ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर सुषमा कोठियाल को सम्मानित किया गया। विशेषज्ञों ने अंगदान से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं, वैज्ञानिक तथ्यों और समाज में प्रचलित भ्रांतियों पर भी विस्तार से जानकारी दी।

इस अवसर पर डॉ. विवेक रोहिला, डॉ. गौरव शेखर शर्मा, डॉ. विवेक विज्जन, डॉ. नुपूर, डॉ. डोरछम सहित अस्पताल के चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी, मरीज और उनके परिजन उपस्थित रहे।

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