देहरादून ,
देहरादून में प्रदेश की बिगड़ती कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, भर्ती घोटालों और महंगाई के मुद्दे पर कांग्रेस के हजारों कार्यकर्ताओं के राजभवन कूच ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया। सोमवार सुबह ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में उमड़ी भीड़ ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों का भी संकेत दिया।
कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा की मौजूदगी में पार्टी के वरिष्ठ नेता एक मंच पर नजर आए और भाजपा सरकार की नीतियों पर जमकर हमला बोला। प्रदेश के 13 जिलों से पहुंचे कार्यकर्ताओं ने करीब 4 किलोमीटर लंबे मार्च के दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
गोदियाल के नेतृत्व में पहला बड़ा कार्यक्रम
चुनावी टीम गठन के बाद प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में यह पहला बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम रहा। सभा में कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार, महंगाई और अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच को लेकर सरकार से जवाब मांगा गया।
लंबे समय बाद नेताओं की एकजुटता ने पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाया है। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि अगला बड़ा प्रदर्शन कुमाऊं में किया जाएगा।
पुलिस से धक्का-मुक्की, गिरफ्तारियां
सभा के बाद कार्यकर्ता जुलूस निकालते हुए राजभवन की ओर बढ़े। हाथीबड़कला के पास पुलिस बैरिकेडिंग पर कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। बाद में कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन ले जाया गया, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया।
वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी
मार्च में हरीश रावत, यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत, करन माहरा, अलका लांबा, ज्योति रौतेला समेत कई विधायक और पूर्व मंत्री शामिल रहे।
सरकार पर गंभीर आरोप
नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में हत्या, लूट, महिलाओं के खिलाफ अपराध और नशे के मामलों से जनता भयभीत है।
-
करन माहरा ने कहा कि सरकार कानून-व्यवस्था संभालने में विफल रही है।
-
हरीश रावत ने विकास की गति थमने और युवाओं के पलायन पर चिंता जताई।
-
यशपाल आर्य ने महिलाओं की सुरक्षा को सबसे बड़ा मुद्दा बताया।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
-
गंभीर अपराधों की समयबद्ध जांच
-
भर्ती घोटालों की निष्पक्ष जांच
-
बेरोजगार युवाओं के लिए विशेष पैकेज
-
महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष अभियान
-
महंगाई नियंत्रण और किसानों के लिए राहत
राजनीतिक मायने
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक राजधानी में कांग्रेस का यह शक्ति प्रदर्शन आगामी चुनावी रणनीति का संकेत है। पार्टी कानून-व्यवस्था और रोजगार को मुख्य मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। आने वाले महीनों में जिला स्तर पर आंदोलन तेज होने के संकेत हैं।