देहरादून ,
विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर श्री महंत इंदिरेश अस्पताल, देहरादून ने चिकित्सा जगत में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए असंभव माने जा रहे पित्ताशय कैंसर के मामले में नई उम्मीद जगा दी है। वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ. अजीत तिवारी के नेतृत्व में अस्पताल की विशेषज्ञ टीम ने 40 वर्षीय मरीज की अत्यंत जटिल और दुर्लभ मल्टीविसरल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह सर्जरी उत्तराखंड में अपने प्रकार की पहली कैंसर सर्जरी मानी जा रही है।
मरीज में पित्ताशय (गॉलब्लैडर) का कैंसर फैलकर लिवर, पित्त नली, डुओडेनम, पैनक्रियास, बड़ी आंत और पेट की दीवार तक पहुंच चुका था। स्थिति इतनी गंभीर थी कि उत्तराखंड समेत देश के कई बड़े अस्पतालों ने इसे ऑपरेशन योग्य न मानते हुए इलाज से इनकार कर दिया था।
कीमोथेरेपी के बाद 11 घंटे चली ऐतिहासिक सर्जरी
अत्यंत गंभीर हालात को देखते हुए मरीज को पहले 6 चक्र कीमोथेरेपी दी गई, जिससे कैंसर की बढ़त पर प्रभावी नियंत्रण पाया गया। पुनर्मूल्यांकन में स्थिति में सुधार के बाद करीब 11 घंटे तक चली जटिल सर्जरी को अंजाम दिया गया। इस दौरान कैंसर से प्रभावित 6 अंगों को एक साथ निकालकर पुनः आपस में जोड़ा गया। चिकित्सा भाषा में इस प्रक्रिया को मल्टीविसरल सर्जरी कहा जाता है।
अंतिम हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि बीमारी पूरी तरह शरीर से निकाल दी गई है। साथ ही 23 लिम्फ नोड्स भी हटाए गए, जो जांच में पूरी तरह कैंसर-मुक्त पाए गए।
एनेस्थीसिया टीम की अहम भूमिका
इस लंबी और जटिल सर्जरी में वरिष्ठ ऑनको एनेस्थेटिस्ट डॉ. निशिथ गोविल की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। मरीज को लंबे समय तक सुरक्षित रूप से बेहोश और स्थिर रखना सर्जरी की सफलता और बाद की रिकवरी के लिए निर्णायक रहा।
तेजी से रिकवरी, आठवें दिन मिली छुट्टी
सर्जरी के बाद मरीज की हालत तेजी से सुधरी और उसे आठवें दिन स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
डॉ. अजीत तिवारी ने बताया कि पित्ताशय कैंसर में इस स्तर की सर्जरी दुनिया भर में बेहद दुर्लभ है और यह उपलब्धि विश्व कैंसर दिवस की थीम ‘यूनाइटेड बाय यूनीक’ को साकार करती है।
कैंसर लाइलाज नहीं, यह सफलता बनी मिसाल
यह ऐतिहासिक सफलता यह संदेश देती है कि कैंसर लाइलाज नहीं है। समय पर जांच, सही कीमोथेरेपी और अनुभवी डॉक्टरों की संयुक्त टीम के प्रयास से सबसे जटिल कैंसर मामलों में भी जीवन बचाया जा सकता है।