सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने समीक्षा बैठक में दिए अहम निर्देश
देहरादून ,
प्रदेश में शहरीकरण की बढ़ती चुनौतियों और भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए जल्द ही नई आवास नीति बनाई जाएगी। साथ ही राज्य के प्रमुख शहरों और धार्मिक स्थलों, विशेषकर चारधाम क्षेत्रों की धारण क्षमता (कैरिंग कैपेसिटी) का निर्धारण भी शीघ्र किया जाएगा। यह निर्देश सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान दिए।
बैठक में सचिव आवास ने उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण तथा जिलास्तरीय विकास प्राधिकरणों के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 एवं 2.0 की प्रगति की जानकारी लेते हुए निर्माण, स्वीकृति एवं आवंटन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किए जाएं, ताकि शहरी क्षेत्रों में जरूरतमंदों को समय पर आवास उपलब्ध कराया जा सके।
डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि वर्ष 2017 में जारी राज्य की आवास नीति की वैधता समाप्त हो चुकी है, ऐसे में नई आवास नीति तैयार करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि नई नीति में किफायती आवास, पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां, शहरीकरण की वर्तमान चुनौतियां और सतत विकास के पहलुओं को विशेष रूप से शामिल किया जाए।
बैठक में एमडीडीए और एचआरडीए की परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। सचिव आवास ने एचआरडीए को निर्देश दिए कि लंबित विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा किया जाए।
एनपीएमसी के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 से संबंधित सभी कार्यों को निर्धारित समय-सीमा सितंबर 2026 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। साथ ही अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर आवंटन सहित सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने के लिए औपचारिक पत्र जारी करने को कहा गया।
बैठक में कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट स्टडी के लिए तैयार ड्राफ्ट पर भी चर्चा हुई। सचिव आवास ने इसे राज्य के प्रमुख नगरों, तीर्थस्थलों एवं संवेदनशील क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों को इस अध्ययन में प्राथमिकता से शामिल करने के निर्देश दिए, ताकि विकास कार्य पर्यावरणीय संतुलन के साथ आगे बढ़ाए जा सकें।
सचिव आवास ने स्पष्ट किया कि नियोजित शहरी विकास, पर्यावरण संरक्षण और जनहित को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार आवास एवं नगर विकास से जुड़ी नीतियों को और अधिक प्रभावी बनाएगी।