हरिद्वार ,
बसंत पंचमी के पावन पर्व पर मौसम की बेरुख़ी भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सकी। हल्की बारिश, कड़ाके की ठंड और शीतल हवाओं के बीच भी हर की पौड़ी पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कंपकंपाती ठंड के बावजूद हजारों श्रद्धालुओं ने माँ गंगा की पवित्र धारा में आस्था की डुबकी लगाई—यह दृश्य श्रद्धा की अद्भुत मिसाल बन गया।
मौसम का मिज़ाज इतना सर्द था कि गंगा जल अत्यंत शीतल हो चुका था। एक डुबकी लगाना भी कई श्रद्धालुओं के लिए चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन भक्ति भाव ने हर भय को पीछे छोड़ दिया। शाम तक हजारों श्रद्धालुओं ने बसंत पंचमी के अवसर पर विधि-विधान से गंगा स्नान किया।
🏔️ पहाड़ों की बर्फबारी का असर, तीर्थ नगरी ठिठुरी
उत्तराखंड के ऊपरी इलाकों में हो रही बर्फबारी का प्रभाव हरिद्वार तक देखने को मिला। लगातार शीतल हवाओं और बारिश के कारण तीर्थ नगरी ठंड की चपेट में रही। श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों तथा गौवंशों को ठंड से राहत दिलाने के लिए विभिन्न स्थानों पर अलाव जलाए गए। गर्म वस्त्रों के बावजूद लोग अलाव का सहारा लेते नजर आए।
🪁 बारिश ने छीनी बसंत की उड़ान, पतंगों के बिना सूनी रही पंचपुरी
बसंत पंचमी पर हरिद्वार की पंचपुरी में पतंग उड़ाने की परंपरा है, लेकिन इस बार बेमौसम बारिश ने उत्सव की रंगत फीकी कर दी। पतंगें या तो उड़ ही नहीं सकीं या भीगकर नीचे गिर गईं। पिछले एक सप्ताह से बच्चों ने नई पतंगें और मांझा संभालकर रखा था, लेकिन बारिश ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। पतंगों के बिना पंचपुरी सूनी नजर आई और बच्चों के चेहरे मायूस दिखे।
✨आस्था मौसम की मोहताज नहीं
बसंत पंचमी 2026 ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि हरिद्वार में श्रद्धा किसी मौसम की मोहताज नहीं। ठंड, बारिश और तेज हवाओं के बावजूद माँ गंगा के प्रति आस्था अडिग रही और गंगा स्नान की परंपरा पूरी श्रद्धा के साथ निभाई गई।