देहरादून ,
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को नानूरखेड़ा स्थित एससीईआरटी ऑडिटोरियम में आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय शैक्षिक उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह में बोर्ड परीक्षाओं में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले 75 मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया। साथ ही, उत्कृष्ट परिणाम देने वाले विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और शीर्ष प्रदर्शन करने वाले 50-50 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को भी सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसमें राष्ट्रप्रेम, नैतिक मूल्य और व्यावहारिकता का समावेश होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा में नवाचार, डिजिटल लर्निंग और भारतीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
धामी ने बताया कि प्रदेश में 226 विद्यालयों को पीएम विद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है और सभी 13 जनपदों में 1300 विद्यालयों में वर्चुअल कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा, बच्चों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें और मेधावी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति भी प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने राज्य में नकल माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किए जाने और पिछले चार वर्षों में 25 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शिता के साथ सरकारी नौकरी मिलने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हाल में परीक्षा गड़बड़ी की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है और राज्य सरकार एक-एक नकल माफिया को पकड़कर सजा दिलाएगी।
धामी ने यह भी बताया कि राज्य में नया अल्पसंख्यक शिक्षा कानून लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत 1 जुलाई 2026 के बाद केवल वे मदरसे संचालित होंगे, जिनमें सरकारी बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि इस साल बोर्ड परीक्षा में प्रथम श्रेणी से पास होने वाले छात्रों की संख्या 18 प्रतिशत बढ़ी है और अंक सुधार परीक्षा से छात्रों पर दबाव कम हुआ है। कार्यक्रम में शिक्षा सचिव रविनाथ रामन, महानिदेशक शिक्षा दीप्ति सिंह और अन्य शिक्षा अधिकारी उपस्थित रहे।