खानापूर्ति नहीं, अब होगी सख्त मॉनिटरिंग — डीएम करेंगे प्रदेशभर में स्वास्थ्य शिविरों की निगरानी – uttarakhandawaaz.in

खानापूर्ति नहीं, अब होगी सख्त मॉनिटरिंग — डीएम करेंगे प्रदेशभर में स्वास्थ्य शिविरों की निगरानी

महिला स्वास्थ्य, निःक्षय मित्र और रक्तदान पर रहेगा विशेष फोकस | 13 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलेगा महाअभियान

देहरादून,

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 13 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलने वाले “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान” को लेकर उत्तराखंड सरकार ने सख्त मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।
अब प्रदेशभर में लगाए जा रहे 4114 स्वास्थ्य शिविरों की जिम्मेदारी सीधे जिलाधिकारियों (DM) को सौंपी गई है, जबकि मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) इनका सहयोग करेंगे।


मंत्री ने दिए कड़े निर्देश

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने शुक्रवार को स्वास्थ्य महानिदेशालय स्थित एनएचएम सभागार में आयोजित वर्चुअल समीक्षा बैठक में कहा कि—

  • स्वास्थ्य शिविरों की सिर्फ खानापूर्ति नहीं होगी, बल्कि DM रोज़ाना मौके पर जाकर निरीक्षण करेंगे।

  • शिविरों में महिला स्वास्थ्य, निःक्षय मित्र अभियान और रक्तदान पर विशेष फोकस रहेगा।

  • विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि रेखीय विभागों और स्थानीय प्रशासन से समन्वय कर आम लोगों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करें।


महिला और बच्चों की सेहत पर जोर

  • अभियान के तहत जिला अस्पताल, उप जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में शिविर लगाए जाएंगे।

  • इन शिविरों में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण, उपचार और परामर्श जैसी सेवाएं निःशुल्क दी जाएंगी।

  • साथ ही स्वैच्छिक रक्तदान शिविर, टीबी रोगियों की स्क्रीनिंग और निःक्षय मित्रों की संख्या बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान रहेगा।


10 हज़ार निःक्षय मित्र बनाने का लक्ष्य

  • सरकार ने टीबी मरीजों के इलाज में सामुदायिक सहयोग बढ़ाने के लिए 10,000 निःक्षय मित्र बनाने का लक्ष्य तय किया है।

  • शिविरों में आमजन को टीबी के प्रति जागरूक करने और रोगियों की पहचान करने पर बल दिया जाएगा।


माइक्रोप्लान और विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात होंगे

बैठक में मंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि—

  • हर दिन स्वास्थ्य शिविरों की मॉनिटरिंग की जाए।

  • माइक्रोप्लान और कैलेंडर तैयार किए जाएं, जिला और ब्लॉक स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त हों, तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

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